
सितारगंज में उत्तरायणी कौतिक के दूसरे दिन कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने दीप प्रज्वलन कर मेले का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर लोक गायिका माया उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत कुमाऊँनी गीतों पर दर्शक झूमते नजर आए।
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उपस्थित जनसमुदाय को उत्तरायणी पर्व की बधाई देते हुए कहा कि लोक संस्कृति, त्योहार और परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्वों को उत्साहपूर्वक मनाना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इन मूल्यों से परिचित हो।

मेले में स्वरोजगार और सांस्कृतिक विविधता
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि बागेश्वर में उत्तरायणी पर्व महिलाओं, बच्चों और युवाओं में जो उत्साह पैदा करता है, वही सितारगंज जैसे मेलों में भी देखा जाना चाहिए। मेले में हस्तशिल्प, हस्तकला और किसानों के स्टॉल लगे हैं, जो स्थानीय उत्पादकों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सितारगंज के मेलों में स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाकर उन्हें बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे छोटे व्यापार और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रोमांच
कार्यक्रम में झोड़ा, छपेली, चाचरी और क्षेत्र के आठ स्कूलों के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर दर्शक झूम उठे। इन प्रस्तुतियों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया।
समिति के अध्यक्ष गोपाल बिष्ट, मेला संरक्षक फकीर सिंह कन्याल ने कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
लोक गायिका माया उपाध्याय के गाए गीत जैसे: “हाय ककड़ी झिलमा”, “खोलि दे माता”, “लाली हो लाली होशिया पधानी”, और “बेड़ू पाको बारामासा” पर दर्शक नाचते और गाते हुए झूम उठे। इन गीतों ने पर्व की लोकधर्मिता और सांस्कृतिक रंगत को जीवंत किया।
प्रमुख अतिथियों का स्वागत
समिति की ओर से कार्यक्रम में राज्य आंदोलनकारी फकीर सिंह कन्याल, ब्लॉक प्रमुख उपकार सिंह बल, सितारगंज सिडकल इण्डस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण सत्यवली, मंडी के पूर्व चेयरमैन अमरजीत कटवाल, और भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
मेलों में यह सामूहिक उत्सव न केवल सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है बल्कि स्थानीय उद्योग और रोजगार को भी प्रोत्साहित करता है।



