केंद्रीय कैबिनेट ने गाजियाबाद-सीतापुर रेल लाइन को दी हरी झंडी, धार्मिक पर्यटन और कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाले अत्यंत व्यस्त गाजियाबाद–सीतापुर रेल खंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना न केवल रेल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक प्रगति को भी नई दिशा देगी।
ट्रैफिक जाम और देरी से मिलेगी राहत
वर्तमान समय में इस रूट पर यात्री और मालगाड़ियों का भारी दबाव है। प्रतिदिन लगभग 120 यात्री ट्रेनें और 40 मालगाड़ियां इस मार्ग से गुजरती हैं। बालामऊ और रोजा जंक्शन पर अन्य रूटों का अतिरिक्त भार जुड़ने के कारण समय पालन की स्थिति काफी प्रभावित हो चुकी है।
नई रेल लाइनों के निर्माण से ट्रेनों को बीच रास्ते में रुकने की आवश्यकता कम होगी, जिससे यात्रा तेज और अधिक समयबद्ध हो सकेगी।
पूर्वोत्तर और दिल्ली के बीच मजबूत कनेक्टिविटी
यह रेल मार्ग दिल्ली को सीधे पूर्वोत्तर भारत से जोड़ता है, इसलिए यहां कोयला, खाद्यान्न और पेट्रोलियम जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई बड़े पैमाने पर होती है।
तीसरी और चौथी लाइन बनने के बाद मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक उपलब्ध होगा, जिससे सामान की ढुलाई तेज और निर्बाध हो जाएगी। अनुमान है कि इससे सालाना 36 मिलियन टन तक माल ढुलाई में वृद्धि संभव है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
इस परियोजना की एक खास विशेषता धार्मिक स्थलों को जोड़ना भी है। हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर और दूधेश्वरनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों को नैमिषारण्य धाम से जोड़कर एक नया धार्मिक सर्किट विकसित किया जाएगा।
अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद नैमिषारण्य आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आई है। यह रेल प्रोजेक्ट नैमिष धाम, अयोध्या और काशी विश्वनाथ जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगा।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
इस विशाल परियोजना के तहत आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा।
करीब 403 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कुल 859 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाएगा।
लगभग 14,926 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना चार वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है।
इसके अंतर्गत छह नए आधुनिक स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें न्यू हापुड़, न्यू मुरादाबाद, न्यू रामपुर, न्यू बरेली, न्यू शाहजहांपुर और न्यू सीतापुर शामिल हैं।
इसके अलावा 5 मेगा ब्रिज, 52 बड़े पुल और 238 रोड अंडरब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा।
एनसीआर और एससीआर के बीच बेहतर समन्वय
यह परियोजना सीतापुर को स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) और नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) के साथ बेहतर ढंग से जोड़ेगी। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और विकास के नए अवसर खुलेंगे।
उद्योगों और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
इस रेल परियोजना से गाजियाबाद की मशीनरी, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, शाहजहांपुर का फर्नीचर उद्योग और सीतापुर के दरी एवं कृषि आधारित उद्योगों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
सीतापुर में पहले से ही बड़े निवेश आ चुके हैं, और नई रेल लाइन से माल ढुलाई में सालाना हजारों करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है।
रोजगार और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव
इस परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। अनुमान है कि इससे लगभग 264 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित होगा।
बेहतर रेल नेटवर्क के कारण सड़क यातायात पर दबाव कम होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।



