उत्तराखंडराज्य

पीपलकोटी टनल हादसे पर UKD ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

चमोली। पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की पीपलकोटी–सियासैंण परियोजना में 13 अगस्त को हुए हादसे के बाद उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने परियोजना प्रबंधन और जिला प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। UKD ने पूछा कि निर्माणाधीन टनल में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों के बावजूद हादसा आखिर कैसे हुआ।

UKD के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना स्थल का दौरा कर सुरक्षा मानकों, श्रमिकों की निगरानी और आपातकालीन व्यवस्थाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए। दल ने हादसे के समय टनल के भीतर मौजूद श्रमिकों की वास्तविक संख्या, उनकी एंट्री-एग्जिट और रियल टाइम लोकेशन रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की।

संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण जारी रखने पर सवाल

UKD ने सवाल उठाया कि यदि हादसे वाला क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील था तो वहां निर्माण कार्य किस आधार पर जारी रखा गया। दल ने प्रोब ड्रिलिंग, जियो-टेक्निकल जांच, पानी के रिसाव की निगरानी, सेफ्टी अलार्म, इमरजेंसी एस्केप सिस्टम और एस्केप टनल से जुड़ी पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

दल ने यह भी पूछा कि टनल का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट आखिरी बार कब कराया गया था। यदि जमीन में मूवमेंट या भूस्खलन के संकेत पहले से मिल रहे थे तो समय रहते निर्माण कार्य क्यों नहीं रोका गया, इसका जवाब भी मांगा गया है।

सेफ्टी ऑफिसर की रिपोर्ट और मॉक ड्रिल का रिकॉर्ड मांगा

UKD ने कहा कि परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी टीएचडीसी और कार्यदायी संस्था में किस अधिकारी या संस्था की थी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। दल ने सेफ्टी ऑफिसर की रिपोर्ट, स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट और पूर्व में कराए गए इमरजेंसी इवैक्यूएशन मॉक ड्रिल का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने की मांग की।

जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पर भी सवाल

UKD ने जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। दल ने परियोजना स्थल पर पूर्व में किए गए सुरक्षा निरीक्षणों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

UKD का कहना है कि यदि सरकारी तंत्र की ओर से परियोजना स्थल का नियमित निरीक्षण किया जा रहा था, तो गंभीर सुरक्षा खामियों का समय रहते पता क्यों नहीं चला। दल ने हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

UKD ने हादसे में मृत श्रमिकों के परिजनों को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को न्यायोचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई।

दल ने चमोली जिले में निर्माणाधीन सभी टनलों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पूरी होने तक संवेदनशील निर्माण कार्यों को रोकने की मांग की है।

कार्यदायी संस्थाओं की भूमिका की जांच की मांग

UKD ने कार्यदायी संस्था HCC से जुड़ी पूर्व परियोजनाओं में कथित लापरवाही के मामलों का भी मुद्दा उठाया। इसके अलावा टीएचडीसी और एनटीपीसी से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं पर अवैध डंपिंग सहित अन्य शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए संबंधित मामलों की जांच की मांग की गई।

दल ने उपनल के माध्यम से परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों का बीमा कराने की मांग भी रखी।

10 दिन में लिखित जवाब नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

मौके पर टीएचडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजय वर्मा ने UKD प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनीं और जल्द आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गांव हाट को सेमलडाला–पीपलकोटी मोटर मार्ग से जोड़ने की मांग भी रखी।

UKD ने टीएचडीसी से सभी सवालों और मांगों पर 10 दिन के भीतर लिखित जवाब देने को कहा है। दल ने चेतावनी दी कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो व्यापक आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

श्रमिकों और ग्रामीणों की सुरक्षा से समझौता नहीं: UKD

UKD ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर श्रमिकों की जिंदगी और ग्रामीणों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दल ने हादसे की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।

इस दौरान UKD जिला अध्यक्ष युधवीर सिंह नेगी, केंद्रीय महामंत्री बृजमोहन सजवाण, वरिष्ठ नेता कमल किशोर डिमरी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सर्वेश्वर पुरोहित सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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