उत्तराखंडराज्य

पंतनगर विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि: 6 नई फसलों की किस्में उत्तराखंड में खेती के लिए अनुमोदित, जानें इनकी खासियत

पंतनगर: देहरादून में कृषि एवं कृषक कल्याण सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखंड राज्य बीज उप-समिति की 16वीं बैठक में एक बड़ा निर्णय लिया गया। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (पंतनगर) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित 6 अलग-अलग फसलों की एक-एक नई प्रजाति को उत्तराखंड की विभिन्न जलवायु दशाओं में खेती के लिए आधिकारिक अनुमोदन मिल गया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने एक साथ 6 फसलों की किस्मों के अनुमोदन पर खुशी जताते हुए सभी वैज्ञानिक टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न और चारे की ये नई किस्में राज्य में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होंगी।

अनुमोदित नई प्रजातियों की विशेषताएं और उत्पादन क्षमता

1. धान: पंत धान 29

  • विशेषता: यह एक कम अवधि में पकने वाली उच्च उत्पादकता वाली बौनी किस्म है।

  • पकाने की अवधि: मात्र 115 दिन।

  • उत्पादन: 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर।

  • लाभ: कम समय में तैयार होने के कारण यह फसल रोग एवं कीटों के प्रकोप से सुरक्षित रहती है।

2. जौ: पंत जौ 1091 (UPB-1091)

  • अनुमोदित क्षेत्र: पर्वतीय (पहाड़ी) क्षेत्र।

  • उत्पादन: पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी औसत उपज क्षमता 38.16 कुंतल प्रति हेक्टेयर पाई गई।

  • तुलना: पिछले 3 वर्षों के परीक्षणों में इसने प्रचलित किस्मों UPB 1008 (21.98%), VLB 130 (8.36%) और VLB 118 (5.87%) की तुलना में अधिक उपज दी है।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह रतुआ (Rust) और आवृत कंड (Covered Smut) रोगों के प्रति अवरोधी है।

3. मक्का: पंत संकर मक्का 9 (DH 353)

  • अनुमोदित क्षेत्र: मैदानी क्षेत्र (एकल संकर/Single Hybrid किस्म)।

  • उत्पादन क्षमता: खरीफ मौसम में 84.85 कुंतल/हेक्टेयर और बसंत ऋतु में 92.13 कुंतल/हेक्टेयर। राज्य स्तरीय औसतन परीक्षणों में इसकी उपज 64.30 कुंतल/हेक्टेयर दर्ज की गई।

  • शारीरिक बनावट: मध्यम ऊंचाई, मजबूत तना, कसे हुए भुट्टे और नारंगी-पीले रंग के सुडौल दाने।

4. राई/भारतीय सरसों: PRB 2015-2

  • उत्पादन वृद्धि: राज्य स्तरीय परीक्षणों में इसने प्रचलित किस्मों PR-20 से 15.55% और क्रांति से 12.95% अधिक उपज दी।

  • विशेषता: मध्यम अवधि (134 दिन) में पकने वाली किस्म, जिसमें तेल की मात्रा 40.8% है। यह कीट एवं रोगों के प्रति प्रतिरोधी है।

5. हरा चारा (ज्वार/चरी): पंत चरी 16 (UTFS 121)

  • प्रकार: एक कटान वाली चारा ज्वार।

  • उत्पादकता: 828.35 कुंतल/हेक्टेयर हरा चारा एवं 124.33 कुंतल/हेक्टेयर सूखा चारा।

  • विशेषता: 50% फूल आने की अवस्था में कटाई करने पर अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाला चारा प्राप्त होता है। यह पत्तियों में होने वाले रोगों के प्रति प्रतिरोधी है।

6. हरा चारा (जई): पंत चारा जई-5 (UPO-16-4)

  • उत्पादकता: 599.48 कुंतल/हेक्टेयर हरा चारा और 131.76 कुंतल/हेक्टेयर सूखा चारा।

  • गुणवत्ता: इसमें न्यूट्रल डिटर्जेंट फाइबर (NDF) और एसिड डिटर्जेंट फाइबर (ADF) की मात्रा कम होने के कारण यह चारा पशुओं के लिए अत्यधिक सुपाच्य और उच्च गुणवत्ता वाला है।

किस्में विकसित करने वाली वैज्ञानिक टीम

  • धान प्रजनक: डॉ. इंद्र देव एवं डॉ. डी. सी. बसखेती।

  • गेहूं व जौ प्रजनक: डॉ. जे. पी. जायसवाल, डॉ. स्वाति प्रशांत एवं डॉ. अनिल कुमार।

  • मक्का प्रजनक: डॉ. एन. के. सिंह।

  • तिलहन (राई) प्रजनक: डॉ. ऊषा पंत, डॉ. राम भजन एवं डॉ. ए. के. सिंह।

  • ज्वार प्रजनक: डॉ. पी. के. पांडेय, डॉ. पी. के. श्रोत्रिया एवं डॉ. शिव जी सिंह।

  • जई प्रजनक: डॉ. बीरेंद्र प्रसाद।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी बधाई

इन प्रजातियों के सफल विकास पर आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभागाध्यक्ष डॉ. जे. पी. जायसवाल, कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अनिल शुक्ला और शोध निदेशक डॉ. एस. के. वर्मा ने पूरी वैज्ञानिक टीम को शुभकामनाएं एवं बधाई दीं।

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