उत्तराखंडराज्य

मेधावियों के मन की बात: जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने साझा किए सफलता के मूल मंत्र

रुद्रपुर में आज का दिन जनपद के मेधावी विद्यार्थियों के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आया। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के सम्मान में एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के केंद्र में रहे जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, जिन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तक के संघर्ष और सफलता की अनकही कहानियों को विद्यार्थियों के सामने साझा किया। उन्होंने न केवल छात्रों की उपलब्धि को सराहा, बल्कि इस सफलता के पीछे छिपे शिक्षकों और अभिभावकों के अथक परिश्रम को भी नमन किया।

करियर और दबाव: “वही चुनें जिसमें आपका दिल रमे”

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी भविष्य की चिंताओं और द्वंद्वों को जिलाधिकारी के समक्ष रखा। विशेषकर “विज्ञान बनाम कला वर्ग” के दबाव और नीट (NEET) जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी को लेकर छात्रों ने अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। जिलाधिकारी ने बड़ी ही सहजता से उत्तर देते हुए कहा कि सामाजिक दबाव में आकर विषय का चयन करना भविष्य के लिए घातक हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरंतरता और उत्कृष्टता केवल उसी क्षेत्र में संभव है, जहाँ आपकी वास्तविक रुचि हो। उनके इन व्यावहारिक उत्तरों ने छात्रों के मन से ‘असफलता के डर’ को निकालकर ‘आत्मविश्वास’ का संचार किया।

केवल किताबी कीड़ा न बनें: समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर

जिलाधिकारी ने मेधावियों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सलाह दी—संतुलित जीवनशैली। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के बोझ तले दबने के बजाय मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को संगीत, खेल, नृत्य और गायन जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। डीएम के अनुसार, ये गतिविधियाँ न केवल पढ़ाई के तनाव को कम करती हैं, बल्कि व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में भी सहायक सिद्ध होती हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ‘सफलता का रोडमैप’

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुरुमंत्र देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि सफलता केवल कड़ी मेहनत से नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट वर्क’ और सही दिशा से मिलती है। उन्होंने तैयारी के तीन स्तंभ बताए:

  • पाठ्यक्रम का गहन विश्लेषण: सबसे पहले परीक्षा के सिलेबस को बारीकी से समझें।

  • ठोस कार्ययोजना: एक अनुशासित समय-सारणी तैयार करें।

  • निरंतर अभ्यास: अभ्यास में निरंतरता ही आत्मविश्वास की कुंजी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बेहतर शैक्षणिक संस्थान और प्रतिस्पर्धी माहौल आपकी सीखने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं।

उपहार स्वरूप मिला ‘ज्ञान और प्रोत्साहन’

कार्यक्रम का समापन अत्यंत भावुक और उत्साहजनक रहा। जिलाधिकारी ने सभी मेधावी विद्यार्थियों को स्मृति स्वरूप जीवनोपयोगी पुस्तकें, बैग और मिष्ठान वितरित किए। यह केवल एक वितरण समारोह नहीं था, बल्कि छात्रों के सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक सांकेतिक कदम था। संवाद ने विद्यार्थियों को एक नया दृष्टिकोण और अपने लक्ष्यों के प्रति एक नई ऊर्जा प्रदान की।

गरिमामयी उपस्थिति

इस प्रेरक अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी सावेद आलम और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उमा शंकर नेगी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और अभिभावक उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

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