
नई दिल्ली: अंडर-19 वर्ल्ड कप के एक बेहद रोमांचक लेकिन रणनीतिक रूप से हैरान करने वाले मुकाबले में भारत ने सेमीफाइनल का टिकट पक्की कर लिया है। पाकिस्तान के सामने सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए 253 रनों के लक्ष्य के साथ-साथ एक कठिन डेडलाइन भी थी, लेकिन पाकिस्तानी टीम ने सेमीफाइनल के गणित को सुलझाने के बजाय केवल मैच जीतने पर ध्यान दिया, जिसके चलते वे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। उन्हें इस मुकाबले में एक बेवकूफ टीम की तरह खेला।
33.3 ओवरों का गणित और पाकिस्तान फेल
सेमीफाइनल के समीकरण के अनुसार, पाकिस्तान को न केवल भारत को हराना था, बल्कि अपने नेट रन-रेट को बेहतर करने के लिए इस लक्ष्य को 33.3 ओवरों के भीतर हासिल करना था। यदि पाकिस्तान ऐसा कर लेता, तो वह भारत को पीछे छोड़कर अंतिम चार में पहुंच जाता। हालांकि, मैदान पर नजारा इसके बिल्कुल विपरीत रहा। पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही बेहद धीमी बल्लेबाजी की, जिससे ऐसा लगा कि उनका मिशन सेमीफाइनल में पहुंचना नहीं, बल्कि किसी भी तरह केवल भारत को हराना है।
भारत के लिए आसान हुई राह
भारतीय टीम को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए या तो यह मैच जीतना था, या फिर पाकिस्तान को 33.3 ओवरों तक लक्ष्य हासिल करने से रोकना था। पाकिस्तान की धीमी शुरुआत ने भारत का काम आसान कर दिया। जैसे ही मैच 34वें ओवर में प्रवेश कर गया, भारत की सेमीफाइनल में जगह तकनीकी रूप से पक्की हो गई। पाकिस्तानी टीम की इस रणनीति पर क्रिकेट विशेषज्ञों ने हैरानी जताई है, क्योंकि उन्होंने टूर्नामेंट में बने रहने के मौके को खुद ही हाथ से जाने दिया।
फैंस में नाराजगी
सोशल मीडिया और क्रिकेट गलियारों में पाकिस्तान की इस प्लानिंग की तीखी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि एक पेशेवर टीम के लिए वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का महत्व किसी भी व्यक्तिगत जीत से बड़ा होना चाहिए। पाकिस्तान ने लक्ष्य का पीछा तो किया, लेकिन जिस गति की जरूरत थी, वह गायब दिखी। इसे रणनीतिक चूक कहें या भारत को हराने का जुनून, अंततः नुकसान पाकिस्तान का ही हुआ और वे खिताब की रेस से बाहर हो गए।


