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बजट 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए 53.47 लाख करोड़ रुपये का बजट किया पेश

नई दिल्ली। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53,47,315 करोड़ रुपये खर्च का बजट (Budget 2026) पेश किया है। पिछला बजट प्रावधान 50,65,345 करोड़ रुपये का था, जिसे संशोधित अनुमान में 1,00,503 करोड़ रुपये घटाकर 49,64,842 करोड़ रुपये किया गया है। इस तरह 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में नए बजट का आकार 7.7 प्रतिशत अधिक है।

इनकम टैक्स, जीएसटी में बदलाव से घटा टैक्स रेवेन्यू

मौजूदा वित्त वर्ष, 2025-26 में खर्च में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की कटौती का एक बड़ा कारण सरकार को करों से होने वाली आय में कमी है। इस वर्ष टैक्स से कुल आय 42,70,233 करोड़ के बजट अनुमान की तुलना में 40,77,772 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यानी इसमें 1,92,461 करोड़ रुपये की कमी आई है। यह पिछले वर्ष न्यू इनकम टैक्स रिजीम में छूट की सीमा बढ़ने और जीएसटी दरों में संशोधन का नतीजा है।

वर्ष 2026-27 में सरकार को टैक्स से कुल 44,04,086 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। इसमें इनकम टैक्स से 14,66,000 करोड़, कंपनियों पर लगने वाले टैक्स से 12,31,000 करोड़, जीएसटी से 10,19,020 करोड़, एक्साइज ड्यूटी से 3,88,910 करोड़ और कस्टम ड्यूटी से 2,71,200 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है।

जीडीपी की तुलना में टैक्स अनुपात कम हुआ

हालांकि जीडीपी की तुलना में टैक्स रेवेन्यू घटने की आशंका है। यह 2021-22 से लगातार 11.4 से 11.5 प्रतिशत तक रहा है। इसके 2026-27 में 11.2 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है। इसमें डायरेक्ट टैक्स 6.9 प्रतिशत और इनडायरेक्ट टैक्स 4.3 प्रतिशत होगा। डायरेक्ट टैक्स अनुपात 2025-26 में 6.8 प्रतिशत और इनडायरेक्ट टैक्स 4.6 प्रतिशत था।

कुल 6,66,228 करोड़ रुपये के नॉन-टैक्स रेवेन्यू में सबसे अधिक 3,91,000 करोड़ रुपये सरकारी बैंकों/कंपनियों के डिविडेंड तथा प्रॉफिट मद में आने की उम्मीद है। पिछले बजट में इस मद में 3,25,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था, जिसे संशोधित कर 3,75,590 करोड़ रुपये किया गया है।

बजट का 32 प्रतिशत इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए

वर्ष 2026-27 में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 12,21,821 करोड़ रुपये का प्रावधान है। पिछले साल 11,21,090 करोड़ के प्रावधान को संशोधित कर 10,95,755 करोड़ किया गया है। यानी इसमें 25,335 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। नए साल के लिए इस मद में 4,92,702 करोड़ रुपये की ग्रांट को जोड़ें तो इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कुल 17,14,523 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। पिछले बजट में यह रकम 15,48,282 करोड़ रुपये थी, जिसे संशोधित कर 14,03,906 करोड़ किया गया है। पूरे बजट का 22.8 प्रतिशत इन्फ्रा के लिए और 9.2 प्रतिशत ग्रांट इन एड (कुल 32 प्रतिशत) के लिए है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला कुल खर्च जीडीपी का 4.4 प्रतिशत होगा।

ब्याज भुगतान की राशि 10 प्रतिशत बढ़ी

पिछली बार की तरह सबसे बड़ा खर्च ब्याज भुगतान में होने वाला है। इसके लिए 14,03,972 करोड़ रुपये रखे गए हैं। पिछले बजट के 12,76,338 करोड़ के प्रावधान को संशोधित कर 12,74,338 करोड़ रुपये किया गया है। कुल बजट का 20 प्रतिशत ब्याज भुगतान में, 11 प्रतिशत रक्षा मद में और 6 प्रतिशत सब्सिडी में खर्च होगा।

राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत की तुलना में 4.3 प्रतिशत

2026-27 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है। यह 2025-26 में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रकम के लिहाज से देखें तो नए साल में यह घाटा 16,95,768 करोड़ रुपये का होगा। इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार 16,63,066 करोड़ रुपये उधार लेगी।

कोरोना महामारी के समय 2020-21 में राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत पर पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद हर साल यह कम हो रहा है। वर्ष 2020-21 में जीडीपी के अनुपात में सरकार का कर्ज भी 6.14 प्रतिशत पर पहुंच गया था। यह भी हर साल घट रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष, 2025-26 में इसके 56.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है और अगले साल का लक्ष्य 55.6 प्रतिशत है।

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