उत्तराखंडराज्य

उत्तराखंड में विकसित होंगी सात एरोमा वैली, 91 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा है कि महक क्रांति नीति के तहत उत्तराखंड में 22,750 हेक्टेयर क्षेत्र में सात एरोमा वैली (सुगंधित खेती क्षेत्र) विकसित की जाएंगी। इस योजना से करीब 91 हजार किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

शुक्रवार को विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों के उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

इन जिलों में विकसित की जाएंगी एरोमा वैली

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग सगंध फसल आधारित वैली विकसित की जाएंगी। इनमें:

  • चमोली और अल्मोड़ा में डैमस्क रोज वैली
  • पिथौरागढ़ में तिमूर वैली
  • ऊधमसिंह नगर में मिंट वैली
  • चम्पावत और नैनीताल में दालचीनी वैली
  • हरिद्वार और पौड़ी में लेमनग्रास वैली

शामिल हैं। इन परियोजनाओं के तहत डैमस्क गुलाब, तिमूर, दालचीनी, लेमनग्रास और मिंट जैसी सगंध फसलों की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है।

किसानों को मिलेगा 80 प्रतिशत तक अनुदान

महक क्रांति नीति के अंतर्गत किसानों को नर्सरी विकास, खेती और स्थापना लागत के लिए 50 से 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए भी 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है।

सगंध फसलों से बढ़ेगा कारोबार और रोजगार

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस नीति का लक्ष्य अगले दस वर्षों में प्रदेश में सगंध फसलों के वार्षिक कारोबार को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,179 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि सगंध खेती को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और किसानों को लाभकारी नकदी फसलों का एक बेहतर विकल्प मिलेगा।

एरोमा टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

बैठक में बताया गया कि किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिए अल्मोड़ा, चमोली, चम्पावत और उत्तरकाशी में सैटेलाइट सेंटर विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर इत्र एवं सगंध उद्यान स्थापित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश में एरोमा टूरिज्म को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

सरकार का उद्देश्य सगंध खेती को किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनाना और उत्तराखंड को एरोमा उत्पादों के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाना है।

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