उत्तराखंडराज्य

देहरादून में ‘आराधना दिवस’ पर सत्य साईं बाबा को श्रद्धांजलि, जगह-जगह हुए सेवा कार्यक्रम

देहरादून सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में श्री सत्य साईं बाबा के निर्वाण दिवस को ‘आराधना दिवस’ के रूप में श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया गया। मुख्य कार्यक्रम श्री साईं ज्योति केंद्र, 58 डी.एल. रोड, देहरादून में भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भक्तों ने भाग लिया।

भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 5:20 बजे सुप्रभातम और ओंकार के पवित्र जाप के साथ हुई। इसके बाद नगर संकीर्तन निकाला गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। प्रातः 9 बजे से मुख्य कार्यक्रम विधिवत रूप से शुरू हुआ।

हवन और लक्ष्यर्चना से हुई विश्व शांति की कामना

कार्यक्रम के दौरान हवन और लक्ष्यर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व शांति, मानव कल्याण और सद्भावना की कामना की गई। ध्वजारोहण और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। इसके साथ ही वैल्यू सॉन्ग के माध्यम से सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा जैसे मूल्यों का संदेश दिया गया।

सेवा कार्यों की दी गई जानकारी

कार्यक्रम में विभिन्न इकाइयों के कन्वीनरों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे सेवा कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। जिला अध्यक्ष ने भविष्य की कार्ययोजना साझा करते हुए सदस्यों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर सेवा कार्यों में सक्रिय रहने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथियों ने साझा किए अनुभव

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल ए. के. बक्शी और उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा उपस्थित रहे। स्टेट प्रेसिडेंट कर्नल योगेंद्र सिंह ने अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया।

लेफ्टिनेंट जनरल ए. के. बक्शी ने अपने संबोधन में श्री सत्य साईं बाबा के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा देती हैं। वहीं कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि बाबा की कृपा से ही उन्हें जनसेवा का अवसर प्राप्त हुआ है।

मंगल आरती और नारायण सेवा का आयोजन

कार्यक्रम के अंत में मंगल आरती संपन्न हुई, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। इसके बाद ‘नारायण सेवा’ के तहत कुष्ठ रोगी आश्रम, मलिन बस्ती और लोहार बस्ती में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया।

सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश

‘आराधना दिवस’ केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सेवा भाव को मजबूत करने का संदेश भी देता है। इस अवसर पर किए गए सेवा कार्यों ने समाज में मानवीय मूल्यों और सहयोग की भावना को और अधिक सशक्त किया।

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