उत्तराखंडराज्य

दानपात्र के पैसों से VIP मेहमाननवाजी? बीकेटीसी पर गंभीर आरोप

देहरादून: अक्सर चर्चाओं में रहने वाली बदरी केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है. इस बार मामला बेहद गंभीर है. आरोप है कि श्रद्धालुओं की ओर से दानपात्र में चढ़ाई गई राशि का इस्तेमाल नेताओं, उनके परिजनों और खास लोगों की आवभगत में किया गया. इन आरोपों के बाद बीकेटीसी ने मामले को गंभीरता लिया. इसीलिए बीकेटीसी ने मामले की जांच के आदेश देते और एक जांच समिति का गठन भी किया.

दरअसल, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी और भाजपा नेता नेहा जोशी के केदारनाथ प्रवास के दौरान उनकी यात्रा और विशेष व्यवस्थाओं के लिए दो दिन में 60 हज़ार रुपए खर्च किए गए. इसके अलावा केदारनाथ विधायक आशा नौटिलाय समेत कई अन्य नेताओं की मेहमाननवाजी में भी इस तरह बीकेटीसी का पैसा खर्च किया गया.

इस आरोपों के बाद खुद नेहा जोशी और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन की ओर से बीकेटीसी अध्यक्ष को पत्र लिखा गया था. वहीं अब इस मामले में बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने एक जांच समिति गठित कर दी है, जो इस मामले के सभी पहलुओं पर गहनता से जांच करेगी.

चार सदस्य जांच समितिमें बीकेटीसी के सीईओ और वित्त नियंत्रक के अलावा दो अन्य लोग है. जांच समिति को 20 दिन का समय दिया गया है. ताकि जांच के बाद रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजने के साथ ही सार्वजनिक की जा सके.

ये मामला सोशल मीडिया के जरिए मेरे संज्ञान में आया है, जिसको देखते हुए बतौर बीकेटीसी अध्यक्ष के रूप में मैंने इस पूरे मामले की जांच के लिए जांच समिति गठित कर दी है. जांच समितिको बीस दिन का समय दिया गया है. जांच रिपोर्ट को शासन को भी भेजा जाएगा.
-हेमंत द्विवेदी, बीकेटीसी अध्यक्ष-

साथ ही बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. वर्तमान समय में क्या सही है और क्या गलत यह कहना उचित नहीं है. फिलहाल तो यहीं कहा जा सकता है कि ये एक बड़ा बड़ा षड्यंत्र है, जिसके तहत सरकार और मंदिर समिति की छवि को खराब करने का प्रयास किया गया है. ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

साथ ही कहा कि नेहा जोशी का पत्र भी उन्हें प्राप्त हुआ है और जिला अध्यक्ष का पत्र भी उन्हें प्राप्त हुआ है. इसमें जांच समिति इन लोगों से भी बातचीत करेगी, लेकिन इस घटनाक्रम के जरिए सरकार और मंदिर समिति की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है.

साथ ही कहा कि आरटीआई से प्राप्त सूचना में एक नोट सीट भी होता है, जिसमें प्रस्ताव समेत अन्य जानकारियां लिखी होती है, लेकिन नोट सीट को सार्वजनिक नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि आरटीआई लगना चाहिए ये अच्छी बात है, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो सके, लेकिन सिर्फ एक साल का ही आरटीआई क्यों लगाई गई? वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है. ऐसे में बीकेटीसी के अंदर कोई अन्य अनियमितता के मामले सामने आते हैं तो उसमें कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि फिलहाल जो मामला सामने आया है, उसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि मंत्री समिति के दान का पैसा वीआईपी के मेहमाननवाजी में इस्तेमाल किया गया है, जो एक गंभीर विषय है. ऐसे में फिलहाल इसकी जांच के लिए जांच समिति गठित की गई है, लेकिन जिन लोगों ने आरटीआई के जरिए सूचना प्राप्त की है कि उन लोगों को पुराने कार्यकाल से संबंधित सूचनाओं के लिए भी आरटीआई लगानी चाहिए थी.

पूरा मामला जानिए: दरअसल, RTI एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी ने एक आरटीआई लगाई थी. आरटीआई के तहत बीकेटीसी के खर्चों की जानकारी मांगी गई थी, जिसके तहत पता चला कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी और बीजेपी महिला नेता नेहा जोशी के केदारनाथ प्रवास के दौरान बीकेटीसी ने करीब 60 हजार रुपए खर्च किए है. इस तरह केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर लगभग 37 हजार 500 रुपये खर्च दर्शाए जाने का दावा किया गया है. इन दोनों के अलावा कई ओर नेताओं पर भी बीकेटीसी ने केदारनाथ में रुपए खर्च किए है. इसीलिए इस मामले में अब जांच के आदेश दिए गए है. क्योंकि अधिकांश नेताओं का कहना है कि उन्होंने अपने खर्च पर केदारनाथ यात्रा की थी.

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