उत्तराखंडराज्य

उत्तराखंड में शुरू हुआ जियोथर्मल ऊर्जा परियोजना का वैज्ञानिक अन्वेषण

देहरादून। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाते हुए चमोली जिले के तपोवन में जियोथर्मल (भू-तापीय) ऊर्जा परियोजना के वैज्ञानिक अन्वेषण कार्य की शुरुआत कर दी है। इस परियोजना के लिए विश्व की प्रमुख आइसलैंड स्थित जियोथर्मल विशेषज्ञ संस्था की भारतीय सहयोगी फर्म को यूजेवीएन लिमिटेड ने तकनीकी परामर्शदाता नियुक्त किया है।

प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर होंगे तकनीकी अध्ययन

प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुन्दरम् ने बताया कि नियुक्त परामर्शदाता परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद ड्रिलिंग, भू-वैज्ञानिक परीक्षण और अन्य आवश्यक तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में भू-तापीय ऊर्जा नीति लागू की थी। इसके बाद जून 2026 में तपोवन जियोथर्मल परियोजना के अन्वेषण का जिम्मा यूजेवीएन लिमिटेड को सौंपा गया।

एक मेगावाट पायलट और 10 मेगावाट वाणिज्यिक परियोजना की संभावना

यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि अब तक किए गए अध्ययनों में तपोवन क्षेत्र को एक मेगावाट क्षमता वाली पायलट परियोजना और 10 मेगावाट क्षमता वाली वाणिज्यिक जियोथर्मल विद्युत परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया है।

उन्होंने बताया कि परियोजना को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए यूजेवीएनएल ने एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन भी किया है, जो परियोजना से जुड़े तकनीकी पहलुओं की निगरानी करेगी।

स्वच्छ ऊर्जा और रोजगार के नए अवसरों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल के लिए यूजेवीएन लिमिटेड और ऊर्जा विभाग की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तपोवन जियोथर्मल परियोजना राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई शुरुआत है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा के नए स्रोतों के विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाई जा रही यह परियोजना भविष्य में उत्तराखंड की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होगी। साथ ही भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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