उत्तराखंडराज्य

संत समाज राष्ट्र चेतना का प्रमुख आधार, उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से कार्यरत सरकार : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में सहभागिता करते हुए संत-महात्माओं का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने आश्रम द्वारा समाज सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

श्रीमद्भागवत कथा जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का माध्यम

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक जागरूकता का संचार करते हैं।

संत समाज ने सदैव राष्ट्र निर्माण को दी नई दिशा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्र चेतना का प्रमुख संवाहक रहा है। देश के इतिहास में संतों और ऋषि-मुनियों ने समाज को सही दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में संत समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रही है।

देश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए दौर का साक्षी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का विस्तार, महाकाल लोक और केदारनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे ऐतिहासिक कार्य देश की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान और ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।

उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक अस्मिता, आध्यात्मिक पहचान और सनातन मूल्यों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

धर्मांतरण विरोधी कानून और यूसीसी जैसे निर्णयों का उल्लेख

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) तथा भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लागू किए गए हैं। इसके साथ ही सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, दर्शन और सनातन परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र में भारतीय संस्कृति, दर्शन और सभ्यता से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय अध्ययन और शोध कार्य किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरिद्वार में भी प्राच्य शोध संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।

संतों के मार्गदर्शन से सशक्त बनेगा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने स्वामी हरिचेतानंद जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए संत समाज से राज्य और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संतों के आशीर्वाद और जनता के सहयोग से उत्तराखंड को देश के अग्रणी और आदर्श राज्यों में शामिल करने का संकल्प अवश्य साकार होगा।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, प्रदीप बत्रा सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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