उत्तराखंडराज्य

बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर विकसित होगा रुद्राक्ष वन, श्रद्धालुओं को मिलेगा आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत अनुभव

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को अब यात्रा मार्ग पर आध्यात्म और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। वन विभाग ने बदरीनाथ धाम के आस्था पथ पर रुद्राक्ष वन विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत यात्रा मार्ग को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनाया जाएगा।

अलकनंदा वन प्रभाग की ओर से इसके लिए भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर लगभग 50 हेक्टेयर भूमि में रुद्राक्ष के पौधे लगाए जाएंगे।

धार्मिक महत्व वाले पौधों से सजेगा यात्रा मार्ग

वन विभाग की योजना केवल रुद्राक्ष तक सीमित नहीं रहेगी। बदरीनाथ हाईवे और आसपास के धार्मिक स्थलों के मार्गों पर कई धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले पौधों का भी रोपण किया जाएगा।

इनमें पीपल, बरगद, भोजपत्र, बेलपत्री, आम, देवदार, सुरांई और पदम जैसे पौधे शामिल हैं। इन वृक्षों का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है, बल्कि तीर्थयात्रियों को पूरे मार्ग में आध्यात्मिक और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव कराना भी है।

आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा प्रयास

गढ़वाल वन संरक्षक आकाश वर्मा ने बताया कि बदरीनाथ धाम के आस्था पथ को धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से विशेष स्वरूप देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है और इस पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

उन्होंने कहा कि योजना के लागू होने के बाद बदरीनाथ यात्रा मार्ग श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और प्रकृति का एक अद्भुत केंद्र बन जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता में इजाफा होगा।

ऑलवेदर रोड परियोजना से प्रभावित हुई हरियाली

बदरीनाथ हाईवे पर ऑलवेदर रोड परियोजना के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई थी। ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम तक सड़क चौड़ीकरण के कारण कई धार्मिक महत्व वाले वृक्ष नष्ट हो गए।

विशेष रूप से पीपल, आम, बरगद और पदम जैसे पेड़ बड़ी संख्या में हटाए गए। वहीं ज्योतिर्मठ से नीती गांव तक हाईवे चौड़ीकरण के दौरान देवदार, भोजपत्र और बुरांस के वृक्षों को भी नुकसान पहुंचा।

यात्रियों को नहीं मिल रही पेड़ों की छांव

पहले बदरीनाथ हाईवे के किनारे नंदप्रयाग, बिरही, भीमतला, पाखी, गरुड़गंगा और हेलंग जैसे पड़ावों पर यात्रियों को बड़े-बड़े पेड़ों की छांव मिलती थी। तीर्थयात्री इन स्थानों पर विश्राम कर अपनी थकान दूर करते थे।

लेकिन वर्तमान समय में हाईवे किनारे स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों की भारी कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में वन विभाग की यह पहल पर्यावरण संतुलन बहाल करने के साथ-साथ यात्रियों को प्राकृतिक छांव और सुकून देने में भी मददगार साबित हो सकती है।

पर्यटन और पर्यावरण दोनों को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि रुद्राक्ष वन और धार्मिक पौधों का रोपण बदरीनाथ यात्रा को एक नया आध्यात्मिक स्वरूप देगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।

इसके साथ ही स्थानीय जैव विविधता को संरक्षित करने और हिमालयी क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button