
रुद्रपुर में आयोजित सरस आजीविका मेला-2026 के आठवें दिवस पर सांस्कृतिक संध्या का भव्य और आकर्षक आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का मनमोहक संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम भारतीय कला केंद्र के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामायण आधारित नृत्य-नाटिका रही, जिसने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया।
रामायण आधारित नृत्य-नाटिका ने बांधा समां
श्रीराम भारतीय कला केंद्र के कलाकारों ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और प्रभावशाली नृत्य शैली के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और संगीत संयोजन ने प्रस्तुति को और भी भव्य बना दिया। इस नृत्य-नाटिका ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि भारतीय सनातन परंपराओं, आदर्शों और नैतिक मूल्यों का संदेश भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत हो उठा।
साधौ बैण्ड की प्रस्तुति से हुई संध्या की शुरुआत
सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ साधौ बैण्ड की ऊर्जावान प्रस्तुति के साथ हुआ। भक्तिमय संगीत के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों की मधुर धुनों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बैण्ड की जीवंत प्रस्तुति और आकर्षक मंच संचालन ने आयोजन स्थल को उत्सवमय वातावरण में परिवर्तित कर दिया। उपस्थित जनसमूह ने संगीत की लय पर तालियां बजाते और थिरकते हुए कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
सांस्कृतिक एकता और स्वरोज़गार को बढ़ावा देता मेला
सरस आजीविका मेला-2026 केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि ग्रामीण उत्पादों, स्वयं सहायता समूहों और स्वरोज़गार को प्रोत्साहन देने का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह मेला स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को पहचान दिलाने के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद और सामाजिक सहभागिता को भी सुदृढ़ कर रहा है। पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी आयोजन की शोभा
इस अवसर पर प्रदेश मंत्री भाजपा गुंजन सुखीजा, सचिव उत्तराखंड शासन दीपेन्द्र चौधरी, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, पीडी हिमांशु जोशी, उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह, गौरव पाण्डेय, जिला प्रोबेशन अधिकारी व्योमा जैन, जिला कार्यक्रम अधिकारी मुकुल चौधरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
आठवें दिवस की यह सांस्कृतिक संध्या मेले की सफलता में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए सभी के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गई।



