
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शनिवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड देशभक्ति, अनुशासन और सैन्य गौरव का अद्भुत उदाहरण बनी। भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए परेड का निरीक्षण किया और नव नियुक्त सैन्य अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।
आईएमए के 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम के प्रशिक्षुओं ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में अपनी नई जिम्मेदारियों की शुरुआत की।
481 भारतीय और 34 विदेशी कैडेट बने सैन्य अधिकारी
इस वर्ष की पासिंग आउट परेड में कुल 515 कैडेट सैन्य अधिकारी बने, जिनमें 481 भारतीय कैडेटों के साथ 16 मित्र देशों के 34 विदेशी प्रशिक्षु भी शामिल रहे। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद इन सभी युवा अधिकारियों ने अपने-अपने देशों की सेनाओं में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
राष्ट्रपति ने परेड की सलामी स्वीकार करते हुए सभी अधिकारियों को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहने का संदेश दिया।
सैन्य अधिकारी राष्ट्र के विश्वास और सम्मान के संरक्षक: राष्ट्रपति
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सैन्य अधिकारी केवल सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक नहीं होते, बल्कि वे देशवासियों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के भी संरक्षक होते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों को सदैव सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।
उन्होंने युवा अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे हर परिस्थिति में नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए सेना की गरिमा और परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे।
नौ महिला कैडेटों की उपलब्धि बनी समारोह का विशेष आकर्षण
इस बार की पासिंग आउट परेड की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में नौ महिला कैडेटों का सैन्य अधिकारी के रूप में चयन रहा। राष्ट्रपति ने इसे भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। इससे देश में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में अधिक युवतियां रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित होंगी।
अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग का मजबूत उदाहरण
राष्ट्रपति ने 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेटों के प्रशिक्षण पूर्ण करने को भारत और अन्य देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी विश्व स्तर पर सैन्य प्रशिक्षण का एक प्रतिष्ठित केंद्र बन चुकी है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विदेशी अधिकारी अपने देशों में भारत के प्रति सद्भावना और सहयोग की भावना को और मजबूत करेंगे।
बदलती चुनौतियों के अनुरूप सेना को करना होगा खुद को तैयार
राष्ट्रपति ने आधुनिक वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और तेजी से विकसित हो रही तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना को लगातार नवाचार और आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध और सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक स्वरूप से अलग होंगी, इसलिए सेना को नई तकनीकों और रणनीतियों को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने युवा अधिकारियों से सैनिकों के कल्याण और सैन्य दक्षता के बीच संतुलन बनाए रखते हुए उच्च नैतिक मूल्यों के साथ नेतृत्व करने का आह्वान किया।
समारोह में मौजूद रहे कई गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र सिंह सहित सेना और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में पहुंचे परिजनों और अतिथियों ने नव नियुक्त अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया और उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।
राष्ट्र की सुरक्षा में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
समारोह के समापन पर राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि नव नियुक्त सैन्य अधिकारी देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि ये युवा अधिकारी भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।



