
चम्पावत जनपद में स्थित उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल मां पूर्णागिरि धाम की आगामी यात्रा के शुभारंभ को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 27 फरवरी से प्रारंभ होने वाली यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए यात्रा मार्गों के सुधार और सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
यात्रा मार्गों के सुधार पर प्रशासन का फोकस
जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशों के क्रम में लोक निर्माण विभाग द्वारा सभी प्रमुख मार्गों पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और यात्रा पूरी तरह सुरक्षित व सुगम बनी रहे।
निर्धारित समय पर गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश
मार्ग सुधार कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्य तय समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में विशेष कार्य
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एम.सी. पलडिया ने जानकारी दी कि भैरव मंदिर के पास भूस्खलन से प्रभावित स्थानों पर एज वॉल और एज गार्ड का निर्माण किया जा रहा है। इससे मार्ग की मजबूती बढ़ेगी और संभावित दुर्घटनाओं से बचाव संभव होगा।
जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्थाओं को किया जा रहा सुदृढ़
भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर के बीच तिलहर धर्मशाला के समीप जल निकासी के लिए स्कबर निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही सिद्धमोड़ और जगदम्बा मोड़ पर फिसलन हटाने, सुरक्षा दीवारें बनाने और रेलिंग लगाने का काम भी तेज गति से किया जा रहा है।
पैदल मार्गों और मुख्य रास्तों का सौंदर्यीकरण
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्य मार्गों और पैदल रास्तों पर टाइल्स बिछाने का कार्य भी किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य यात्रा मार्ग को सुरक्षित, मजबूत और श्रद्धालु अनुकूल बनाना है।
31 दिसंबर तक पूरे होंगे सभी कार्य
अधिशासी अभियंता के अनुसार प्रस्तावित सभी कार्य आगामी 31 दिसंबर तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। इससे मां पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आरामदायक यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।



