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साबुन, शैम्पू से टूथपेस्ट तक की पैकेजिंग से होगी वेज-नॉनवेज की पहचान, सरकार ने बदले नियम

नई दिल्ली। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक का सामान खरीदते समय अब ग्राहकों को ये पहचानना आसान होगा कि सामान वेज है या नॉनवेज। सरकार इन सामान की पैकेजिंग के लिए कलर कोडिंग अनिवार्य कर दी है। सरकार ने इस बारे में नियमों में बदलाव किया है और इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है। नए नियम सोमवार यानि 21 सितंबर से लागू हो गए हैं।

लेबलिंग से जुड़े नियमों में बदलाव

केंद्र सरकार ने इन प्रोडक्ट्स की लेबलिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। सरकार ने लेबलिंग से जुड़ी जरूरतों को तय करने के लिए लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स, 2011 में बदलाव किया है। नियमों के मुताबिक यह निशान पैकेज के मुख्य डिस्प्ले पैनल के सबसे ऊपर होना चाहिए, ताकि खरीदारी करते समय ग्राहकों के लिए वेज-नॉनवेज की पहचान करना आसान हो।

पैकैजिंग में होगा बदलाव

इस बदलाव में खास तौर पर साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, दूसरे कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज को शामिल किया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स की पुरानी पैकेजिंग में बदलाव करना होगा यानि नई सप्लाई में पैकेजिंग पर ही ग्राहकों को प्रोडक्ट के वेज और नॉनवेज होने का पता चल जाएगा। कुछ जानकारों के मुताबिक शुरुआती दिनों में कंपनियों को इसमें कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन लॉन्ग टर्म में उनकों फायदा होगा।

नियमों में क्यों किया गया बदलाव?

यह बदलाव लीगल मेट्रोलॉजी रुल्स में संशोधन के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य पैकेजिंग पर दी जाने वाली जानकारी को ग्राहकों के लिए ज्यादा स्पष्ट और आसानी से समझने योग्य बनाना है। अब ग्राहक को प्रोडक्ट के लेबल पर यह जानकारी ढूंढने के लिए किसी लंबी सूची या छोटे अक्षरों में लिखी जानकारी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

खरीदारी करते समय कैसे करें पहचान ?

अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट या कॉस्मेटिक्स खरीदते समय पैकेट के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से पर ग्राहक अब जरूर देखें। वहां दिया गया हरा, लाल-भूरा संकेत प्रोडक्ट के वेज और नॉनवेज होने के बारे में बताएगा। हालांकि दूसरी जरूरी जानकारी के लिए ग्राहकों को लंबी सूची या जरूरी लेबल ही पढ़ने पड़ेंगे।

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