उत्तराखंडराज्य

ग्राम पतरामपुर में “सरकार जनता के द्वार” कार्यक्रम का आयोजन

रुद्रपुर के ग्राम पतरामपुर में “सरकार जनता के द्वार” कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों की समस्याओं को सुना गया और उनका मौके पर ही समाधान किया गया। साथ ही उपस्थित लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई।

कृषि विभाग द्वारा जागरूकता अभियान

मुख्य कृषि अधिकारी ऊधम सिंह नगर, डॉ. विकेश कुमार सिंह यादव ने किसानों को “धरती माता बचाओ अभियान” के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार करने से फसल उत्पादन अधिक होता है और लागत में कमी आती है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है।

जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

किसानों को हरी खाद और जैविक खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही एजोटोबैक्टर, राइजोबियम, पीएसवी और पीएसएम जैसे जैव उर्वरकों के प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी गई। प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि अपनाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा अमोनियम सल्फेट जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी गई।

उर्वरकों की उपलब्धता और उपयोग संबंधी निर्देश

जनपद में रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता होने की जानकारी देते हुए किसानों से अपील की गई कि वे केवल आवश्यक मात्रा में ही उर्वरक खरीदें और घर पर अनावश्यक भंडारण न करें।

कृषि योजनाओं में अनुदान की जानकारी

कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को बीज, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कृषि रक्षा रसायनों पर अनुदान की जानकारी दी गई। धान बीज पर 50% (अधिकतम ₹2000 प्रति क्विंटल) और दलहन-तिलहन बीजों पर 50% (अधिकतम ₹5000 प्रति क्विंटल) का अनुदान उपलब्ध है। इसके अलावा अन्य इनपुट पर भी 50% तक की सहायता (अधिकतम ₹500 प्रति हेक्टेयर) दी जाती है। एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक अनुदान का लाभ मिल सकता है।

अधिक लाभ के लिए वैकल्पिक फसलों की खेती

किसानों को पारंपरिक फसलों जैसे धान और गेहूं के स्थान पर अधिक लाभकारी फसलों जैसे सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती अपनाने की सलाह दी गई। इन फसलों की विशेषता यह है कि इन्हें जंगली जानवर और आवारा पशु कम नुकसान पहुंचाते हैं।

आत्मा योजना के तहत प्रशिक्षण और पुरस्कार

आत्मा योजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण और भ्रमण के अवसर प्रदान किए जाते हैं। साथ ही कृषि, डेयरी, फल-सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को “किसान श्री” (₹10,000), “किसान भूषण” (₹25,000) और “किसान रत्न” (₹50,000) जैसे पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। इच्छुक किसान अपने विकास खंड से आवेदन कर सकते हैं।

डिजिटल फार्मर आईडी बनवाना हुआ जरूरी

बैठक में किसानों से डिजिटल फार्मर आईडी (फार्मर रजिस्ट्री) बनवाने की अपील की गई। भविष्य में सभी योजनाओं का लाभ इसी आईडी के आधार पर दिया जाएगा। इसके लिए ग्राम और विकास खंड स्तर पर नियुक्त ऑपरेटर गांव-गांव जाकर यह कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा किसान जन सेवा केंद्र (सीएससी) या स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी अपना पंजीकरण कर सकते हैं।

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