उत्तराखंडराज्य

समान नागरिक संहिता पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आपत्ति

देहरादून में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने उत्तराखंड और गुजरात विधानसभाओं द्वारा पारित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कड़ा विरोध जताया है। बोर्ड का मानना है कि यह कानून संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इसे लागू करना नागरिक अधिकारों के लिए चुनौती बन सकता है।

संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

बोर्ड के अनुसार, UCC संविधान के भाग-3 में दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसमें विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि किसी भी कानून को लागू करते समय इन मूल अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

नीति-निर्देशक तत्व और UCC की स्थिति

समान नागरिक संहिता को संविधान के भाग-4 के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में शामिल किया गया है, जो कि एक नीति-निर्देशक तत्व है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि ये तत्व बाध्यकारी नहीं होते, इसलिए इन्हें जबरन लागू करना उचित नहीं माना जा सकता।

डॉ. आंबेडकर के आश्वासन का हवाला

बोर्ड ने यह भी उल्लेख किया कि संविधान सभा के दौरान डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने आश्वासन दिया था कि UCC को किसी पर थोपने का प्रयास नहीं किया जाएगा और इसे लागू करने से पहले व्यापक जन-सहमति आवश्यक होगी।

‘यूनिफॉर्म’ होने पर सवाल

गुजरात में लागू UCC में अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस आधार पर बोर्ड का तर्क है कि जब सभी समुदायों पर समान रूप से कानून लागू नहीं हो रहा, तो इसे ‘यूनिफॉर्म’ कहना उचित नहीं है।

विधि आयोग और पारदर्शिता पर चिंता

21वें और 22वें विधि आयोग ने भी UCC को वर्तमान समय में लागू करने को जल्दबाजी बताया था। इसके अलावा, उत्तराखंड और गुजरात में गठित समितियों की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिसे बोर्ड ने पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप का मुद्दा

बोर्ड का कहना है कि UCC मुस्लिम पर्सनल लॉ के अहम पहलुओं जैसे निकाह, तलाक और विरासत में हस्तक्षेप करता है। यह अनुच्छेद 25 और 26 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उत्तराखंड में इस कानून को हाईकोर्ट में चुनौती भी दी गई है।

अन्य मुद्दों पर भी जताई नाराजगी

बोर्ड ने मदरसा व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप, मस्जिद और मजारों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों पर भी विरोध दर्ज कराया है। साथ ही सांप्रदायिक घटनाओं में पुलिस की निष्क्रियता और मुस्लिम नाबालिगों के अपहरण मामलों में चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

सरकार से निष्पक्षता की अपील

बोर्ड ने सरकार से सभी नागरिकों के अधिकारों की समान और निष्पक्ष रक्षा करने की मांग की है। साथ ही UCC के क्रियान्वयन पर रोक लगाने, इसकी संवैधानिक समीक्षा कराने और व्यापक जन-परामर्श सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख लोग

इस अवसर पर डॉ. सैयद क़ासिम रसूल इलयास, जो बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, और एडवोकेट रजिया बेगम सहित कई अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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