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लंदन कोर्ट का बड़ा फैसला, नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया को ₹100 करोड़ देने का आदेश

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की अदालत से बड़ा झटका लगा है. लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव को बैंक का 10.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार बताया है. लंदन कमर्शियल कोर्ट के जज साइमन टिंकलर ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि नीरव मोदी ने बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए कर्ज की व्यक्तिगत गारंटी दी थी और अब वह इस रकम की अदायगी के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है.

लंदन कोर्ट से नीरव मोदी को बड़ा झटका

कोर्ट ने कहा कि नीरव मोदी पर मुख्य रकम के तौर पर करीब 4.1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 38.9 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है. इसके अलावा बैंक की ओर से तय नियमों के हिसाब से ब्याज की रकम भी इसमें जोड़ी जाएगी. नीरव मोदी ने अदालत में बैंक के दावे को चुनौती दी थी. उसके वकीलों ने तर्क दिया कि बैंक की ओर से दी गई व्यक्तिगत गारंटी लागू नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि बैंक ने सही तरीके से मांग नहीं की और कर्ज खत्म करने का आधार भी पर्याप्त नहीं था.

कोर्ट ने नीरव मोदी की दलीलों को किया खारिज

नीरव मोदी ने यह भी दावा किया कि उसे अप्रैल 2018 और अक्टूबर 2025 में भेजे गए नोटिस नहीं मिले क्योंकि उस समय वह भारत में नहीं था. लेकिन जज साइमन टिंकलर ने नीरव मोदी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि बैंक के नोटिस सही तरीके से पहुंचाए गए थे. कोर्ट ने कहा कि अक्टूबर 2025 का नोटिस उस जेल के पते पर भी भेजा गया था जहां नीरव मोदी रह रहा था. इसके अलावा अदालत ने यह भी माना कि साल 2019 में नीरव मोदी ने अप्रैल 2018 वाले नोटिस की कॉपी अपने वकीलों को दी थी, जिससे साबित होता है कि उसे इसकी जानकारी थी.

जज ने अपने फैसले में कहा कि फरवरी 2018 से यह साफ हो गया था कि नीरव मोदी और फायरस्टार ग्रुप की कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है. कोर्ट ने नीरव मोदी के एक ईमेल का भी जिक्र किया जिसमें उसने बैंक को बताया था कि मीडिया में खबरें आने के बाद कंपनी के कामकाज पर असर पड़ा और कंपनियां अपने बकाये का भुगतान करने की स्थिति में नहीं रहीं.

बैंक को कर्ज वापस मांगने का पूरा अधिकार

जज ने कहा कि इस स्थिति में बैंक को कर्ज वापस मांगने का पूरा अधिकार था और नीरव मोदी की दी गई गारंटी की कीमत भी प्रभावित हुई थी. बता दें कि नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में बंद है और भारत में उसके खिलाफ चल रहे मामलों को लेकर प्रत्यर्पण की कानूनी लड़ाई लड़ रहा है.

मामला साल 2012 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड FZE को कर्ज दिया था. इस कर्ज के लिए नीरव मोदी ने 3 अगस्त 2013 को बैंक के साथ व्यक्तिगत गारंटी (Personal Guarantee) भी दी थी. बैंक का कहना था कि अगर कंपनी कर्ज नहीं चुकाती है तो नीरव मोदी व्यक्तिगत तौर पर इस रकम को वापस करने के लिए जिम्मेदार होंगे.

बैंक ऑफ इंडिया की बड़ी जीत

साल 2018 में जब पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया और नीरव मोदी पर आरोप लगे, तब बैंक ऑफ इंडिया ने अपना कर्ज वापस मांगने की प्रक्रिया शुरू की. बैंक ने मार्च और अप्रैल 2018 में नीरव मोदी और उसकी कंपनी को भुगतान के लिए नोटिस भेजे, लेकिन बैंक के मुताबिक इन नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला. बैंक ऑफ इंडिया की यह जीत भारतीय बैंकों के लिए विदेशों में फंसे कर्ज की वसूली की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

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