उत्तराखंडराज्य

चम्पावत में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन, 74 मामलों में ₹2.43 करोड़ से अधिक का हुआ सेटलमेंट

जनपद चम्पावत में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान विभिन्न मामलों का आपसी सहमति के आधार पर त्वरित निस्तारण किया गया। इस दौरान कुल 74 मामलों का समाधान करते हुए ₹2.43 करोड़ से अधिक की धनराशि का सेटलमेंट कराया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन माननीय अध्यक्ष एवं जिला जज अनुज कुमार संगल की अध्यक्षता तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भवदीप रावते के निर्देशन में जिला न्यायालय परिसर चम्पावत और बाह्य न्यायालय टनकपुर में संपन्न हुआ।

अधिवक्ताओं और बैंक अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका

लोक अदालत में जिला बार संघ चम्पावत, तहसील बार संघ टनकपुर, पैनल अधिवक्ताओं, विभिन्न बैंकों के अधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया। सभी मामलों का निस्तारण आपसी सुलह और समझौते के आधार पर किया गया, जिससे पक्षकारों को त्वरित राहत मिली।

प्रथम पीठ में हुआ ₹2.12 करोड़ से अधिक का सेटलमेंट

राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत गठित प्रथम पीठ में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चम्पावत द्वारा 25 लंबित मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल ₹2,12,66,242 की धनराशि का सफल सेटलमेंट कराया गया।

वहीं दूसरी पीठ में सिविल जज जूनियर डिवीजन टनकपुर न्यायालय द्वारा 24 मामलों का निस्तारण करते हुए ₹5,04,400 की राशि का समझौता कराया गया।

प्री-लिटिगेशन मामलों में भी मिला समाधान

राष्ट्रीय लोक अदालत के अतिरिक्त प्री-लिटिगेशन स्तर पर मनी रिकवरी से जुड़े 25 मामलों का भी सफल निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल ₹25,47,470 की धनराशि का सेटलमेंट कराया गया।

इस प्रकार जनपद के सभी न्यायालयों में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत और प्री-लिटिगेशन मामलों को मिलाकर कुल 74 मामलों का समाधान किया गया तथा ₹2,43,18,112 की राशि का सेटलमेंट संपन्न हुआ।

त्वरित और सुलभ न्याय का प्रभावी माध्यम बनी लोक अदालत

इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम लोगों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी मंच है। इसके माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर समय और धन दोनों की बचत कर सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालतों के माध्यम से न्यायालयों में लंबित मामलों के भार को कम करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है, जिससे न्याय व्यवस्था अधिक प्रभावी बन रही है।

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