
देहरादून में जन संघर्ष मोर्चा ने प्रदेश में लगातार बंद हो रहे सरकारी प्राइमरी स्कूलों को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग पर कड़ा प्रहार किया है। मोर्चा का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य के 826 प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य स्कूल भी बंद होने की कगार पर हैं। संगठन ने इस स्थिति के लिए शिक्षा विभाग की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
शिक्षा मंत्री को ठहराया जिम्मेदार
मोर्चा अध्यक्ष और जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति के लिए सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री की अदूरदर्शी नीतियों और लापरवाही के कारण सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। इसी कारण संगठन ने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।
गरीब परिवारों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सरकारी स्कूल बंद होने का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। इन परिवारों के पास निजी विद्यालयों की महंगी फीस देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। मजबूरी में अभिभावक कर्ज लेकर अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सरकारी स्कूलों से दूरी क्यों बना रहे अभिभावक?
मोर्चा अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण अभिभावक सरकारी स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इस समस्या को लेकर कभी विभागीय स्तर पर कोई कार्यशाला आयोजित की गई या अभिभावकों और आम जनता से संवाद स्थापित किया गया। उनके अनुसार सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने की आशंका
नेगी ने आशंका जताई कि कहीं सरकारी विद्यालयों को कमजोर कर निजी स्कूलों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के पास मौजूद अन्य विभागों में भी आम जनता को अपेक्षित न्याय नहीं मिल पा रहा है।
मंत्री को पद से हटाने की मांग
जन संघर्ष मोर्चा ने सरकार और राजभवन से मांग की है कि जिन मंत्री पर विभिन्न मोर्चों पर विफल रहने के आरोप लग रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए और उन्हें पद से हटाया जाए। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
पत्रकार वार्ता में विजय राम शर्मा और दिलबाग सिंह भी मौजूद रहे।



