
देहरादून। चारधाम मार्ग स्थित होटल व्यवसायियों के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट से मुलाकात कर चारधाम यात्रा की गाइडलाइन में शिथिलीकरण की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने यात्रियों की संख्या सीमित करने और ऑनलाइन-ऑफलाइन पंजीकरण की बाध्यता समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। इस पर श्री भट्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत कर उचित निर्णय का आश्वासन दिया।
चारधाम यात्रा का धार्मिक और आर्थिक महत्व
यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर हुई बैठक में उत्तराखंड चारधाम होटल व्यवसाय संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम विश्वभर में धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह यात्रा न केवल सनातन संस्कृति की आस्था से जुड़ी है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था का भी प्रमुख आधार है।
पंजीकरण प्रणाली से प्रभावित व्यवसाय
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्तमान में चारधाम यात्रा में आने वाले यात्रियों की संख्या ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण के माध्यम से सीमित की गई है। इससे राज्य के होटल व्यवसायी, टूर-ट्रैवल ऑपरेटर, दुकानदार, टैक्सी चालक, घोड़ा-खच्चर और डोली-पालकी संचालकों समेत लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
होटल व्यवसायियों की मुख्य मांगें
होटल व्यवसायियों ने सरकार से निम्नलिखित सुझाव दिए:
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चारधाम यात्रा में यात्रियों की संख्या पर लगी ऑनलाइन और ऑफलाइन सीमा समाप्त की जाए।
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यात्रा मार्गों पर लगाए गए बैरिकेड सिस्टम को हटाया जाए।
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यात्रा को अधिक सरल और सुगम बनाने के लिए व्यावहारिक निर्देश जारी किए जाएं।
सरकार का आश्वासन
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस विषय पर विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने कहा कि चारधाम क्षेत्र के लोगों की आजीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था को देखते हुए वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा को सुगम और सुव्यवस्थित बनाना आवश्यक है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि
मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान, उत्तराखंड चारधाम यात्रा होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता, संदीप राणा, सरदार सिंह राणा, रणजीत रावत, नीतीश रमोला सहित अन्य होटल व्यवसायी उपस्थित रहे।



