सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की ऐतिहासिक शुरुआत

भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। एनएचपीसी लिमिटेड ने देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, 2000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की पहली यूनिट का वाणिज्यिक संचालन शुरू कर दिया है। 250 मेगावाट क्षमता की यह यूनिट (यूनिट-2) 23 दिसंबर 2025 से औपचारिक रूप से व्यावसायिक रूप से चालू हो गई है।
केंद्रीय मंत्री ने किया वर्चुअल शुभारंभ
केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने वर्चुअल माध्यम से इस यूनिट का शुभारंभ किया। उन्होंने इसे तकनीकी दक्षता, वर्षों की मेहनत और सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उनके अनुसार, यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत के समग्र विकास, राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को मजबूती देने और भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ऊर्जा संक्रमण की दिशा में मील का पत्थर
विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने सुबनसिरी लोअर परियोजना को भारत की ऊर्जा ट्रांजिशन यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने शेष यूनिटों को तय समय-सीमा के भीतर चालू करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं एनएचपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेन्द्र गुप्ता ने इस सफलता का श्रेय केंद्र सरकार, अरुणाचल प्रदेश और असम सरकारों, परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, कर्मचारियों और सभी हितधारकों को दिया।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 2000 मेगावाट है, जिसे 250 मेगावाट की आठ यूनिटों में विकसित किया गया है। इससे प्रतिवर्ष लगभग 7,422 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा। यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे ऊँचा 116 मीटर का कंक्रीट ग्रेविटी बाँध है। बाढ़ नियंत्रण के लिए इसमें 442 मिलियन क्यूबिक मीटर का फ्लड कुशन उपलब्ध कराया गया है। परियोजना से देश के 16 राज्यों को बिजली आपूर्ति होगी, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों को 1000 मेगावाट बिजली मिलेगी। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश और असम को निःशुल्क विद्युत का आवंटन भी किया जाएगा।
आगे की कार्ययोजना और क्षेत्रीय लाभ
यूनिट-2 के चालू होने के बाद परियोजना की तीन और यूनिटें जल्द ही संचालन में लाई जाएंगी। शेष चार यूनिटें 2026-27 के दौरान चरणबद्ध रूप से शुरू की जाएंगी। यह परियोजना न केवल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि रोजगार सृजन, सामाजिक-आर्थिक विकास, बाढ़ नियंत्रण और क्षेत्रीय समृद्धि में भी अहम योगदान देगी।



