
देहरादून स्थित विधानसभा सभागार में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने विभागीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस दौरान राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों और कार्यप्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
आपदा से पहले, दौरान और बाद की रणनीतियों पर चर्चा
बैठक में मंत्री ने आपदा से पूर्व की तैयारियों, आपदा के समय की त्वरित कार्रवाई और आपदा के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों को इन तीनों चरणों में बेहतर समन्वय और तत्परता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उत्तराखंड को मॉडल राज्य बनाने का लक्ष्य
मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए सुझाव दिया कि उन देशों की कार्यप्रणाली से सीख ली जाए, जो बार-बार आपदाओं का सामना करते हैं।
जिला स्तर पर सिस्टम मजबूत करने पर जोर
मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन की सफलता के लिए जिला स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कम्युनिकेशन सिस्टम को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान हो सके और राहत कार्यों में देरी न हो।
ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश
उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण और संचार उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। इससे वे आपदा की स्थिति में तुरंत जिला और राज्य स्तर पर सूचना पहुंचा सकेंगे।
‘आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ की होगी तैनाती
राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर ‘आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। इन स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण, उपकरण और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने की भी बात कही गई।
आपदा पूर्वानुमान और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष फोकस
मंत्री ने अधिकारियों को आपदाओं के पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। उन्होंने राज्य की संवेदनशील झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने की भी आवश्यकता जताई।
विशेषज्ञ संस्थानों से समन्वय के निर्देश
संवेदनशील क्षेत्रों के अध्ययन के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जूलोजी के विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया। इससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संभावित खतरों का आकलन किया जा सकेगा।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के उपचार को प्राथमिकता
मंत्री ने भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील स्थलों की पहचान कर उनके उपचार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के लिए रोस्टर तैयार करने को कहा, जिनमें वे स्वयं भी भाग लेंगे।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
इस बैठक में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन, संयुक्त सचिव एन.एस. डुंगरियाल, यूएसडीएमए के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।



