उत्तराखंडराज्य

हिमालयी सुरक्षा पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने जताई चिंता, संगोष्ठी में सुरक्षा, आधारभूत संरचना और सामाजिक समन्वय पर जोर

देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से नि) गुरमीत सिंह ने आज क्लेमेंट टाउन, देहरादून में आयोजित संगोष्ठी में हिस्सा लिया और हिमालयी क्षेत्र विशेषकर भारत-चीन सीमा के मध्य सेक्टर में सुरक्षा और विकास पर अपने विचार साझा किए।

हिमालय: केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रणाली

राज्यपाल ने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू-आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियाँ सतत सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं।

सुरक्षा में समन्वय और स्थानीय समुदाय की भूमिका

राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा केवल सैन्य तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सैन्य, नागरिक प्रशासन और स्थानीय समुदाय का प्रभावी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि ये केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सुरक्षा के सहभागी और बलवर्धक हैं।

वाइब्रेंट विलेज और सामाजिक-आर्थिक विकास

राज्यपाल ने ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये न केवल सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं, बल्कि जनसंख्या स्थिरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति को भी मजबूत करते हैं।

आधारभूत संरचना और रणनीतिक गतिशीलता

उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सड़कें, सुरंगें, पुल, हवाई संपर्क और दूरसंचार सुविधाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चारधाम परियोजना न केवल तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाती है, बल्कि रणनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती देती है।

आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण

राज्यपाल ने आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन, उन्नत निगरानी प्रणालियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म की उपयोगिता को रेखांकित किया, लेकिन कहा कि ये तकनीक नेतृत्व और विवेक का विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने पर्यावरण संतुलन को भी सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बताया और पर्यटन, सुरक्षा और संरक्षण के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संबोधन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित जनसंख्या को देखते हुए सेना, नागरिक प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती नागरिक देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत इन गांवों का विकास और सशक्तिकरण किया जा रहा है।

जीओसी-इन-सी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी

जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने भी सुरक्षा, नागरिक समाज सशक्तिकरण और अवसंरचना विकास पर अपने विचार साझा किए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button