उत्तराखंडराज्य

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत का आरोप, जगतोली मिनी स्टेडियम निर्माण में हुआ भारी भ्रष्टाचार

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जगतोली में निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम के नाम पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, झूठे दावों और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र भेजकर स्टेडियम का हैंडओवर होने से पहले किसी स्वतंत्र एजेंसी से थर्ड-पार्टी तकनीकी निरीक्षण कराने की पुरजोर मांग की है।

निरीक्षण के दौरान सामने आई हकीकत

मनोज रावत ने बताया कि दशज्युला-क्यूडी-मलास के आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने उनका ध्यान मिनी स्टेडियम के निर्माण कार्य की ओर आकर्षित किया। इसके बाद उन्होंने खुद मौके पर जाकर निर्माण कार्य का जायजा लिया। पूर्व विधायक का कहना है कि मैदान का विस्तारीकरण और समतलीकरण उनके विधायक कार्यकाल में विधायक निधि से कराया गया था, और वर्तमान में जो मैदान दिख रहा है, वह उसी समय तैयार हो चुका था।

कागजों में आधुनिक सुविधाएं, धरातल पर शून्य

पूर्व विधायक के अनुसार, इस मिनी स्टेडियम परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 1 करोड़ रुपये बताई गई थी। शिलान्यास के दौरान 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, जिम और चेंजिंग रूम जैसी आधुनिक खेल सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर इनमें से अधिकांश सुविधाएं नदारद हैं।

मिट्टी खुदाई के नाम पर 40 लाख का खेल!

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए मनोज रावत ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घोर अनियमितताएं बरती गई हैं। मैदान में वास्तविक खुदाई न के बराबर हुई है, जबकि कागजों में लगभग 40 लाख रुपये की मिट्टी खुदाई दर्शाई गई है। इसके अलावा, निर्माण के दौरान किसी भी जिम्मेदार इंजीनियर की नियमित निगरानी भी देखने को नहीं मिली।

बाहरी निर्माण एजेंसी पर सवाल (साहू मॉडल का आरोप)

मनोज रावत ने निर्माण एजेंसी के चयन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कार्य ‘भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड’ (लखनऊ) द्वारा कराया जा रहा है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग (PWD) और आरईएस (RES) जैसी सरकारी निर्माण एजेंसियां पहले से उपलब्ध हैं, तो लखनऊ से जुड़ी संस्था को यह ठेका देने का क्या औचित्य था? उन्होंने इसे भाजपा सरकार का कथित “साहू मॉडल” करार दिया।

हैंडओवर से पहले थर्ड-पार्टी जांच की मांग

पूर्व विधायक ने चिंता जताते हुए कहा कि निर्माण एजेंसी बिना मानकों को पूरा किए कार्य पूर्ण दर्शाकर स्टेडियम को जल्दबाजी में हैंडओवर करने की तैयारी में है। उन्होंने मांग की है कि स्टेडियम का हैंडओवर रोकने के साथ ही किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से इसका तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना की डीपीआर (DPR) और थर्ड-पार्टी निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही वे आगे विस्तृत कदम उठाएंगे।

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