
उत्तराखंड में नीट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) दाखिले में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य कोटे की आरक्षित सीटों में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
मामले की पृष्ठभूमि और कांग्रेस का रुख
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (राजीव भवन) में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया:
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जांच का दायरा: उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रमाणपत्रों के भौतिक सत्यापन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी पड़ताल होनी चाहिए।
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सीबीआई (CBI) जांच की मांग: प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने मांग की है कि आवश्यकता पड़ने पर इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
आरक्षित श्रेणियों में धांधली की आशंका
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा द्वारा उठाए गए इस मामले में आरोप है कि नीट उत्तीर्ण कुछ अभ्यर्थियों ने राज्य कोटे का गलत फायदा उठाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए।
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प्रभावित श्रेणियां: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और पूर्व सैनिक कोटे में कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया है।
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स्थानीय छात्रों के अधिकारों का हनन: धस्माना ने स्पष्ट किया कि यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला दिया गया है, तो यह उत्तराखंड के मेधावी और योग्य छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा मामले में दिए गए जांच के आदेश का स्वागत तो किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि साधारण स्तर की जांच से इस नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश होना संभव नहीं है।
विशेष टिप्पणी: इस पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी भी उपस्थित रहीं और उन्होंने भी राज्य के योग्य युवाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

