
देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम में सीमांत क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा मुख्यालय में हुए इस ज्वाइनिंग कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों ने सभी पूर्व सैनिकों का स्वागत करते हुए उन्हें संगठन से जुड़ने पर बधाई दी।
धारचूला क्षेत्र से आए पूर्व सैनिकों ने ली सदस्यता
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल और दीप्ति रावत ने धारचूला विधानसभा क्षेत्र से आए पूर्व सैनिकों को पटका पहनाकर पार्टी में शामिल कराया। इस मौके पर पूर्व सैनिकों ने कहा कि वे लंबे समय से राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं और अब औपचारिक रूप से भाजपा के साथ जुड़कर देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं।
भाजपा ने बताया गर्व का विषय
प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल ने अपने संबोधन में कहा कि सैनिक हमेशा से राष्ट्र और उसकी विचारधारा के प्रति समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवा निवृत्ति के बाद उनका भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए गर्व की बात है। साथ ही उन्होंने सभी नए सदस्यों से संगठन के साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अनुभव से मजबूत होगा संगठन
दीप्ति रावत ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने सेना में रहते हुए देश की सेवा की है और अब वे राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पूर्व सैनिकों का अनुभव भाजपा संगठन को और अधिक मजबूत बनाएगा।
कई प्रमुख पूर्व सैनिक हुए शामिल
स्वामी वीरेंद्रानंद जी महाराज की प्रेरणा से भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख पूर्व सैनिकों में कैप्टन भूपाल सिंह रावल, सूबेदार पुष्कर वर्मा, सूबेदार धन सिंह, नायब सूबेदार नारायण सिंह, हवलदार किशन सिंह रावत, नयन सिंह रौतेला, भूपेंद्र सिंह, जगत धामी, कैलाश सिंह, चंद्र सिंह, गणेश सिंह, प्रेम बल्लभ भट्ट, भुवन चंद, विनोद सिंह, गजेन्द्र सिंह, रोहित सिंह, प्रकाश रावत और पंकज रावत सहित कई अन्य शामिल रहे।
कार्यक्रम में कई पदाधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, गणेश भंडारी, प्रदेश कार्यालय सचिव जगमोहन रावत, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, सोशल मीडिया संयोजक हिमांशु संगथानी, जिला महामंत्री इंदर लूंठी और आशीष गिरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
पूर्व सैनिकों का भाजपा में शामिल होना न केवल संगठन के विस्तार का संकेत है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों में पार्टी की बढ़ती पकड़ को भी दर्शाता है। आने वाले समय में यह कदम राज्य की राजनीति में नए समीकरण भी स्थापित कर सकता है।



