व्यापार

ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आज अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजों का ऐलान कर दिया है, लेकिन कर्जदारों और घर खरीदारों के लिए इस बार कोई ‘गुड न्यूज’ नहीं आई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है, जिसका सीधा मतलब है कि फिलहाल आपके होम लोन या कार लोन की EMI में कोई कटौती नहीं होगी। इसके साथ ही RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि फिलहाल RBI न तो ब्याज दरें घटाने का स्पष्ट संकेत दे रहा है और न ही बढ़ाने का।

बजट 2026 के लक्ष्यों और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता को देखते हुए RBI ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है। आखिर क्यों रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें घटाने से हाथ खींच लिए और कब तक आपको सस्ती EMI का इंतजार करना होगा? आइए जानते हैं इस फैसले की हर बारीक बात।

कितनी है GDP ग्रोथ रेट

RBI मॉनेटरी पॉलिसी 2026 की बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद सकारात्मक तस्वीर पेश की है। गवर्नर ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर (GDP) के अनुमानों में बढ़ोतरी करते हुए बताया कि पहली तिमाही (Q1) में इसके 6.9% और दूसरी तिमाही (Q2) में 7% रहने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत स्थिति में बनी हुई है और विकास की यह मौजूदा रफ्तार आगे भी जारी रहने की पूरी संभावना है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में एमपीसी के फैसले पूरी तरह से देश की बदलती आर्थिक स्थितियों और आंकड़ों पर आधारित होंगे, जो यह संकेत देता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय बाजार को लेकर रिजर्व बैंक का भरोसा काफी बढ़ा हुआ है।

रिजर्व बैंक ने महंगाई (CPI Inflation) के मोर्चे पर राहत के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों का भी अनुमान जताया है। आरबीआई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए कुल महंगाई दर 2.1% रहने का अनुमान है, जबकि इस वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (Q4FY26) में यह 3.2% रह सकती है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में महंगाई का दबाव थोड़ा बढ़ सकता है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1FY27) में इसके 4% और दूसरी तिमाही (Q2FY27) में 4.2% तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

एक साल में 4 बार घटा रेपो रेट

रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) पिछले एक साल के दौरान ब्याज दरों में कटौती का एक लंबा सफर तय कर चुकी है, जिससे कर्जदारों को खासी राहत मिली है। आंकड़ों पर गौर करें तो फरवरी 2025 में 0.25% और फिर अप्रैल में 0.25% की कटौती के साथ इस सिलसिले की शुरुआत हुई थी। इसके बाद जून 2025 में आरबीआई ने बड़ा कदम उठाते हुए दरों में 0.5% की भारी कटौती की। हालांकि, अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में दरों को स्थिर रखा गया, लेकिन साल के अंत में यानी दिसंबर 2025 में एक बार फिर 0.25% की राहत दी गई। पिछले एक साल के भीतर कुल 1.25% (125 बेसिस प्वाइंट) की इस बड़ी कटौती के बाद अब आर्थिक विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि रिजर्व बैंक के पास फिलहाल ब्याज दरों को और कम करने की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है। यही कारण है कि अब बाजार में स्थिरता की उम्मीद ज्यादा की जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button