उत्तराखंडराज्य

देवस्थानम बोर्ड विवाद फिर गरमाया, केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों ने आंदोलन की दी चेतावनी

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में देवस्थानम बोर्ड का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में गठित देवस्थानम बोर्ड के जरिए सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं, तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों और सनातन व्यवस्था की अनदेखी की गई।

तीर्थ पुरोहितों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में देवस्थानम बोर्ड जैसी किसी व्यवस्था को दोबारा लागू करने का प्रयास किया गया तो गांव स्तर से लेकर विधानसभा तक व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

संवाद के बिना गठन का लगाया आरोप

केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के गठन के समय तीर्थ पुरोहितों से उचित संवाद नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से उनके पारंपरिक अधिकार प्रभावित हुए और धार्मिक व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप हुआ।

उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के दौरान तीर्थ पुरोहितों को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसे समुदाय आज भी भूला नहीं है।

धार्मिक परंपराओं और विरासत की रक्षा पर जोर

संतोष त्रिवेदी ने कहा कि केदारनाथ धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और तीर्थ पुरोहितों की विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में देवस्थानम बोर्ड जैसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश हुई तो तीर्थ पुरोहित और स्थानीय समाज एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करेंगे।

लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का ऐलान

तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सनातन परंपराओं और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।

देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों के इस रुख के बाद उत्तराखंड में चारधाम व्यवस्थाओं और धार्मिक मामलों से जुड़ी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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