
देहरादून। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से पुराने शिक्षकों को छूट देने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर रविवार को प्रदेशभर के शिक्षकों ने राजधानी देहरादून में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल धरना-प्रदर्शन में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने हिस्सा लिया और सरकार से अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।
आरटीई एक्ट से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग
सभा को संबोधित करते हुए शिक्षकों ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। उत्तराखंड के शिक्षक भी इसी मुद्दे को लेकर संघर्षरत हैं। वक्ताओं ने कहा कि पुराने शिक्षकों के अनुभव और सेवा को देखते हुए उन्हें टीईटी परीक्षा की बाध्यता से बाहर रखा जाना चाहिए।
शिक्षकों की उपेक्षा हुई तो होंगे गंभीर परिणाम
प्रांतीय तदर्थ समिति के पदाधिकारी मनोज तिवारी ने कहा कि यह आंदोलन केवल मांगों को लेकर नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई भी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया और उनकी लगातार उपेक्षा होती रही तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
पुरानी पेंशन और अन्य लंबित मुद्दों पर भी हुई चर्चा
धरना-प्रदर्शन के दौरान टीईटी से छूट के अलावा पुरानी पेंशन योजना की बहाली, सेवा संबंधी समस्याओं और अन्य लंबित मांगों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से लंबित इन मुद्दों के समाधान के लिए सरकार को सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
नारेबाजी के बीच सचिवालय की ओर बढ़ा शिक्षक समुदाय
सभा के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक रैली के रूप में सचिवालय की ओर कूच के लिए रवाना हुए। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षकों ने दिखाई एकजुटता
रैली के संयोजक धर्मेंद्र रावत ने कार्यक्रम में शामिल सभी शिक्षकों और संगठन प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेशभर से मिली एकजुटता शिक्षकों की ताकत और उनके संघर्ष के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षकों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।
कार्यक्रम में दिगंबर सिंह नेगी, जितेंद्र सिंह वाल्दिया, दीपक सजवान, पूरन बोरा, वीरेंद्र सिंह कटायत, दीपक सिंह रावत, अश्वनी कुमार चौहान, विनोद रतूड़ी, उत्तम सिंह फर्त्याल, देवेंद्र सिंह चौधरी, प्रीतम बर्त्वाल, देवेश डोभाल, चंद्रवीर सिंह नेगी, मनोज जुगरान, किशोर जोशी, विक्रम सिंह झिंगवान, जयदेव राणा, रूपक पुरी, दिनेश चंद्र भट्ट, हेमेंद्र चौहान, जगदीश भंडारी, मनीष राणा, विजेंद्र पवार और वीपुल भंडारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रकाश चंद जोशी ने किया।



