
देहरादून। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के स्थापना के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर उत्तराखंड में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक “सहकारिता सप्ताह-2026” का व्यापक आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों और विकासखंडों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को अधिक मजबूत बनाना और आम नागरिकों को इसकी उपयोगिता से जोड़ना है। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “सहकार से समृद्धि, देवभूमि की प्रगति” निर्धारित की गई है।
तैयारियों की समीक्षा, सफल आयोजन के दिए निर्देश
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शुक्रवार को अपने शासकीय आवास पर विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सहकारिता सप्ताह की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सप्ताहभर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों का प्रभावी और सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सहकारिता का संदेश पहुंच सके।
किसानों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), जिला सहकारी बैंकों और अन्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता की भूमिका और महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़े।
सप्ताहभर होंगे चौपाल, कार्यशालाएं और सम्मेलन
सहकारिता सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में सहकारी चौपाल, जनजागरूकता शिविर, कृषि, उद्यान, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन से संबंधित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा महिला सहकारी सम्मेलन और युवा सहकारी सम्मेलन भी आयोजित होंगे, जिनमें विभिन्न योजनाओं और अवसरों की जानकारी साझा की जाएगी।
डिजिटलीकरण और हरित कृषि को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण, ई-पैक्स व्यवस्था के विस्तार, सामाजिक सहभागिता तथा हरित एवं सतत कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सहकारी संस्थाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की मजबूत कड़ी है सहकारिता
सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत आधार भी है। उन्होंने सभी जिलों और विकासखंडों में जनप्रतिनिधियों, सहकारी संस्थाओं और आम नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
उद्घाटन से समापन तक होंगे कई विशेष आयोजन
29 जून को राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह और सहकारिता संकल्प के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इसके बाद अलग-अलग दिनों में सहकारी चौपाल, जागरूकता शिविर, कृषि एवं डेयरी कार्यशालाएं, महिला एवं युवा सम्मेलन, पैक्स की वार्षिक आम बैठक, हरेला महोत्सव के अंतर्गत वृक्षारोपण अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 6 जुलाई को सहकारिता मंत्रालय स्थापना दिवस, राष्ट्रीय सहकारी महोत्सव तथा उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों के सम्मान समारोह के साथ सहकारिता सप्ताह का समापन होगा।
समीक्षा बैठक में अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में संयुक्त निबंधक एम.पी. त्रिपाठी, रमेन्द्री मंद्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं प्रदेश के सभी जिलों के सहायक निबंधक और महाप्रबंधक वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल होकर कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी साझा करते रहे।



