
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सी एस डी कैंटीन, खटीलसंडा में सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने 7.15 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन और 1.62 करोड़ रुपये से निर्मित सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम का स्वागत और श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री का स्वागत एनसीसी बैंड ने किया। समारोह की शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा अपने पिता स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी के चित्र पर श्रद्धा अर्पित करने से हुई। इसके बाद उन्होंने नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चंपावत जिलों के शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। शहीदों के परिजनों और वीरांगनाओं को शॉल और उपहार देकर सम्मानित किया गया।

वीर सैनिकों और वीरांगनाओं का सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 60 वीर नारियों और 80 वीर सैनिकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह अवसर न केवल नवनिर्मित कैंटीन और सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण करने का है, बल्कि उनके पिता की पुण्य स्मृति में भावपूर्ण आयोजन का भी प्रतीक है। उन्होंने अपने जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को अपनाने के लिए पिता का धन्यवाद किया।

पिता से मिली प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति की सीख
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता ने 28 वर्षों तक सेना की महार रेजिमेंट में सेवा देते हुए 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के साथ ऑपरेशन ब्लूस्टार और ऑपरेशन रक्षक जैसे अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने वीर सैनिकों की कथाओं से प्रेरणा लेकर राजनीति और समाज सेवा के मार्ग को चुना।

भारत की रक्षा और सैन्य ताकत में प्रगति
धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब रक्षा उपकरणों का निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। रक्षा उत्पादन 46 हजार करोड़ से बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात 1 हजार करोड़ से बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने भारतीय सेना की बलिदान और वीरता की कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश की मजबूत सैन्य शक्ति का प्रतीक है।

राज्य सरकार की पहल और सैनिक कल्याण
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहीदों और सैनिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ चला रही है। इसमें शहीद परिवारों को नौकरी, आश्रितों को लाभ, वीरांगनाओं के लिए पेंशन वृद्धि और सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा शामिल हैं। साथ ही वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के लिए स्थायी सम्पत्ति की खरीद पर छूट भी दी जा रही है।
वीरभूमि उत्तराखंड और सैनिक परिवारों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि बताया। उन्होंने कहा कि सैनिक परिवारों के संघर्ष, त्याग और संस्कार राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किए जाते रहेंगे। उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य करती रहेगी।
अन्य गणमान्य उपस्थित
कार्यक्रम में कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक कुलदीप धनकड़, दर्जा मंत्री विनय रुहेला, पूर्व सैनिक अध्यक्ष गम्भीर सिंह धामी सहित अनेक गणमान्य और पूर्व सैनिक उपस्थित थे।



