उत्तराखंडराज्य

भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण

देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड प्रांत प्रचार प्रमुख संजय ने कहा कि भारत एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व की जीवन दृष्टि और सनातन परंपराएं अब वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित हो रही हैं। उनके अनुसार, देश के मन से गुलामी की मानसिकता धीरे-धीरे समाप्त हो रही है और आज पूरी दुनिया भारत को आशा और मार्गदर्शन के केंद्र के रूप में देख रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन होगा।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका

रविवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज दुनिया अनेक समस्याओं और संकटों से जूझ रही है, ऐसे समय में भारत की सांस्कृतिक विरासत और जीवन दर्शन एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आ सकते हैं। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सामाजिक संरचना विश्व में संतुलन और शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

समाज में एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का महत्व

संजय ने समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास और सशक्तिकरण के लिए यह आवश्यक है कि समाज अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ा रहे। यही जुड़ाव राष्ट्र को स्थिरता और प्रगति प्रदान करता है।

भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता

अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय पंचांग की विशेषताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कालगणना विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक प्रणालियों में से एक है। भारत को समझने के लिए केवल बाहरी दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे वैज्ञानिक और दार्शनिक आधार को समझना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विक्रम संवत 2083 चल रहा है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है। भारतीय युगाब्द के अनुसार वर्तमान समय 5128 वर्ष से अधिक माना जाता है, जबकि सृष्टि की कालगणना लगभग 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख वर्षों से अधिक की मानी जाती है।

नववर्ष के प्रमुख विषय और प्रेरणाएं

नववर्ष के अवसर पर कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों को केंद्र में रखा गया है। इनमें संत शिरोमणि संत रैदास जी की 650वीं जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष, राम मंदिर आंदोलन के 550 वर्षों का इतिहास और गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस जैसे विषय शामिल हैं। इनका उद्देश्य महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों को अपनाना और विश्व में शांति का संदेश फैलाना है।

स्वयंसेवकों के लिए संदेश और पर्यावरण संरक्षण

संजय ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा में समाज धीरे-धीरे मतभेदों को भुलाकर संगठित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का संगठन मजबूत होना चाहिए और स्वयंसेवकों को अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया।

सेवा कार्यों की सराहना और देश सुरक्षा पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री 108 महंत कृष्णा गिरी महाराज ने संघ द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से संसाधनहीन क्षेत्रों में सेवा का कार्य अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, क्योंकि जब देश सुरक्षित रहेगा तभी नागरिक सुरक्षित रहेंगे।

अनुशासित पथ संचलन का आयोजन

कार्यक्रम के उपरांत हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन किया। हल्की बारिश के बावजूद स्वयंसेवकों ने अनुशासन के साथ मार्च किया, जिसका विभिन्न स्थानों पर फूलों की वर्षा और जयघोष के साथ स्वागत किया गया। यह संचलन परेड ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः वहीं समाप्त हुआ। इस दौरान विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति

इस अवसर पर संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें महानगर संघ चालक, सह संघ चालक, प्रांत अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

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