BJP जल्द घोषित करेगी UP के 14 जिलाध्यक्ष, होली के आस-पास हो सकता है प्रदेश की नई इकाई का गठन

लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक फैसलों को लेकर एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रही है। पार्टी की कार्यशैली के अनुसार किसी भी निर्णय से पहले सभी राजनीतिक, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों पर गहन मंथन किया जाता है, भले ही इसमें कुछ विलंब क्यों न हो जाए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को अंतिम रूप देने से पहले दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संकेत हैं कि 20 फरवरी से पहले शेष 14 जिलों के जिलाध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है। साथ ही होली के आसपास नई प्रदेश इकाई के गठन की संभावना जताई जा रही है, जिसमें बड़े स्तर पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
संगठन विस्तार की प्रक्रिया और देरी के कारण
फरवरी के पहले सप्ताह से संगठन विस्तार की तैयारी शुरू कर दी गई थी, किंतु एसआईआर की तिथि बढ़ने और कई राजनीतिक समीकरणों के आपसी टकराव के चलते प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया गया। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मार्च और नवंबर में दो बार जिलाध्यक्षों की सूची जारी की गई थी, फिर भी सभी 98 संगठनात्मक जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी नहीं हो सकी। इससे स्पष्ट है कि पार्टी हर जिले में संतुलित और रणनीतिक चयन सुनिश्चित करना चाहती है।
2024 लोकसभा चुनाव के बाद नई रणनीति
2024 के लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न मिलने के बाद भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में ठोस कदम उठाए। समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले की काट खोजने के प्रयास में 16 मार्च को 70 जिलाध्यक्षों की पहली सूची जारी की गई, जिसमें जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया। इसके बाद 26 नवंबर को 14 जिलाध्यक्षों की दूसरी सूची घोषित की गई, जिसमें पांच चेहरों को दोबारा अवसर देकर संगठनात्मक निरंतरता का संकेत दिया गया।
ब्रज क्षेत्र में सबसे अधिक नियुक्तियां
घोषित किए गए 14 नामों में सबसे अधिक पांच जिलाध्यक्ष ब्रज क्षेत्र से थे। अब जिन 14 जिलों में अध्यक्षों की घोषणा शेष है, वहां पार्टी ने कई स्तरों पर मंथन और फीडबैक प्रक्रिया पूरी की है। हालांकि यूजीसी से जुड़ी राजनीति और जातीय समीकरणों में उभरते बदलाव के कारण अंतिम सूची में क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन नई दिशा ले सकता है।
प्रदेश और क्षेत्रीय टीम एक साथ घोषित होने की संभावना
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि केवल जिलाध्यक्षों की घोषणा ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय टीम और पूरी प्रदेश इकाई की घोषणा एक साथ की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह संगठनात्मक रूप से एक व्यापक और समन्वित बदलाव माना जाएगा। होली के आसपास संभावित नई टीम भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति और चुनावी तैयारियों की दिशा तय कर सकती है।



