
देहरादून। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने देश में अनुसंधान, नवाचार और तकनीक आधारित उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग 1000 करोड़ रुपये के लक्ष्य वाले ‘महा निधि कोष’ (सुपर एंडोमेंट फंड) की स्थापना की घोषणा की है। आइवीकैप वेंचर्स और न्यूक्वांट के सहयोग से शुरू की जा रही यह पहल भारत के वैज्ञानिक, तकनीकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
फ्रांस में आयोजित ‘भारत नवाचार 2026’ कार्यक्रम में हुई घोषणा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत नवाचार 2026’ कार्यक्रम के दौरान की गई। शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से संचालित इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा स्थायी और आत्मनिर्भर वित्तीय तंत्र विकसित करना है, जो देश के आईआईटी नेटवर्क में अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी विकास को दीर्घकालिक सहयोग प्रदान कर सके।
रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन
महा निधि कोष के माध्यम से जलवायु प्रौद्योगिकी, ऊर्जा प्रणालियां, अर्धचालक (सेमीकंडक्टर), उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए वैश्विक विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, उद्योग जगत, निवेशकों, नवप्रवर्तकों और परोपकारी संगठनों को भी इस पहल से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया है।
175 वर्षों की विरासत को भविष्य की तकनीकों से जोड़ेगा कोष
आईआईटी रुड़की की 175 वर्षों से अधिक पुरानी शैक्षणिक और अनुसंधान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह कोष पूर्व छात्रों, उद्योग जगत, परोपकारी संस्थाओं और संस्थागत निवेशकों के योगदान को एक साझा मंच पर लाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों का समाधान करने वाली तकनीकों और नवाचारों को मजबूत वित्तीय आधार उपलब्ध कराना है।
एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वच्छ ऊर्जा पर विशेष फोकस
इस कोष के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम संगणना, सेमीकंडक्टर तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन, स्वास्थ्य सेवाएं, उन्नत विनिर्माण, कृषि प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही नई तकनीकों के विकास और वैश्विक स्तर की बौद्धिक संपदा सृजन को भी गति मिलेगी।
शिक्षा, उद्योग और निवेश जगत के बीच बनेगा मजबूत नेटवर्क
प्रस्तावित निधि मॉडल शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत, निवेशकों और पूर्व छात्रों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा। इससे नवाचार आधारित स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाएं, पेटेंट विकास और सामाजिक प्रभाव वाले तकनीकी समाधानों को निरंतर समर्थन मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।
भारतीय नवाचार को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा कि यह केवल एक वित्तीय कोष नहीं, बल्कि भारतीय नवाचार को निरंतर गति देने वाला एक परिवर्तनकारी मंच है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से संस्थान में विकसित विचारों को सफल उद्यमों, वैश्विक स्तर की तकनीकों और विश्वस्तरीय बौद्धिक संपदा में परिवर्तित किया जाएगा।
पूर्व छात्रों की भूमिका होगी अहम
आइवीकैप वेंचर्स के संस्थापक एवं प्रबंध भागीदार विक्रम गुप्ता ने कहा कि इस पहल का मूल उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों के पूर्व छात्रों द्वारा अर्जित संसाधनों और अनुभवों को नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं और उद्यमियों तक पहुंचाना है। वहीं न्यूक्वांट के संस्थापक किसलय कांत ने कहा कि भारत के पास उन्नत प्रौद्योगिकी नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की अपार क्षमता है और यह कोष अनुसंधान, उद्यमिता तथा वैश्विक निवेश के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा।
वैश्विक साझेदारी के लिए किया गया आह्वान
आईआईटी रुड़की और उसके सहयोगी संगठनों ने पूर्व छात्रों, उद्योग जगत, निवेशकों, परोपकारी संस्थाओं, वैश्विक विश्वविद्यालयों और रणनीतिक साझेदारों से इस पहल में सहभागी बनने का आह्वान किया है। संस्थान का मानना है कि सामूहिक प्रयासों और नवाचार आधारित सहयोग से भारत को ज्ञान-प्रधान और तकनीक-संचालित अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।



