
देहरादून। नीट-यूजी 2025 (NEET-UG 2025) में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला दिलाने वाले गिरोह के खिलाफ देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में शामिल एक और आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से ₹5.58 लाख नकद बरामद किए हैं।
पूर्व में गिरफ्तार आरोपी से मिला था कमीशन
एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पूछताछ में आरोपी धीरज ने स्वीकार किया कि यह रकम उसे पूर्व में गिरफ्तार आरोपी रूपेश पंडित ने दी थी। यह राशि ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे’ का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के एवज में कमीशन के रूप में मिली थी।
फर्जी प्रमाणपत्रों पर दर्ज हुए थे मुकदमे
उल्लेखनीय है कि 13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। जांच में पाया गया कि अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय फर्जी दस्तावेज लगाए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देशों पर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण-1) जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था।
जांच में खुले पते और फर्जीवाड़े के राज
एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाए और जांच आगे बढ़ाई। दस्तावेजों की पड़ताल में अभ्यर्थियों के आवेदनों में दिए गए पते फर्जी पाए गए, जिसके बाद पुलिस उनके वास्तविक ठिकानों तक पहुंची।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 21 सितंबर को आरोपी रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके आवास से ₹8 लाख की नकदी बरामद की गई थी।
‘MBBS Way’ के नाम से चलाता था कंसल्टेंसी
पुलिस जांच में सामने आया कि 37 वर्षीय आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव (निवासी: भोपाल) इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘MBBS Way’ नाम से एक परामर्श कार्यालय चलाता था। वह निजी विश्वविद्यालयों में कमीशन के आधार पर एमबीबीएस और अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिला कराने का काम करता था। लगभग दो वर्ष पूर्व उत्तरकाशी के एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में उसकी मुलाकात रूपेश पंडित से हुई थी, जिसके बाद से दोनों मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे।
फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से मिला एडमिशन
पुलिस के अनुसार, अरविंद कुमार ने अपनी बेटी और दो अन्य परिचित बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क साधा था। कम अंक वाले अभ्यर्थियों को दाखिला दिलाने के लिए उन्होंने उत्तराखंड के ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे’ का फायदा उठाने की साजिश रची।
धीरज, रूपेश और उनके अन्य सहयोगियों ने मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए। इन्हीं फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाया गया।
अब तक ₹13.58 लाख नकद बरामद, आगे की जांच जारी
पुलिस का कहना है कि एसआईटी मामले के सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रही है और विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में अब तक:
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धीरज कुमार श्रीवास्तव के पास से: ₹5,58,100
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रूपेश पंडित की निशानदेही पर: ₹8,00,000
(कुल ₹13.58 लाख नकद बरामद किए जा चुके हैं।)



