अंतर्राष्ट्रीय

बांग्लादेश के NSA ने अजीत डोभाल की होस्ट की गई कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव मीटिंग में हिस्सा लिया

नई दिल्ली: बांग्लादेश की ओर से पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग फिर से किए जाने के बीच वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ खलीलुर रहमान इन दिनों दिल्ली में हैं। रहमान सातवें कोलंबो सेक्योरिटी कॉन्क्लेव में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आए हैं । इसी सिलसिले में रहमान ने अपनी टीम के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ मुलाकात की। दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन की ओर से जारी हुए आधिकारिक बयान के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच कॉन्क्लेव के अलावा मुख्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बात की।

रहमान ने डोवाल को बांग्लादेश आने का न्योता भी दिया

बातचीत के दौरान रहमान ने अजीत डोभाल को बांग्लादेश आने का न्योता भी दिया। 20 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस कॉन्क्लेव में मालदीव, मॉरिशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल हो रहे हैं। इस बार की बैठक में सेशेल्स को ऑब्जर्वर राज्य और मलेशिया को बतौर मेहमान बैठक में बुलाया गया है।

विदेश मंत्रालय का बयान कहता है कि ये डायलॉग सुरक्षा और साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इस दौरान सभी सदस्य देशों को आतंकवाद और कट्टरपंथ, संगठित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर सुरक्षा और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत सहयोग को लेकर विचार साझा करने का मौका मिलेगा।

क्यों अहम है दौरा

ये यात्रा ऐसे वक्त हो रही है, जब भारत में रह रही शेख हसीना को लेकर, दोनों देशों के बीच रिश्ते असहज हैं। बीते साल जुलाई की हिंसा से जुड़े केस को लेकर आईसीटी के फैसले से पहले ही बांग्लादेश का मुहम्मद युनूस प्रशासन हसीना की प्रत्यर्पण की मांग भारत से करता रहा है। अब बीते सोमवार को ही द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए उन्होंने भारत से कहा कि हसीना और असदुज्जमा खान कमाल को बांग्लादेश को सौंप दिया जाना चाहिए।

भारत से हसीना का प्रत्यर्पण मुश्किल

हालांकि, भारत सरकार के रुख से नहीं लगता कि हसीना का प्रत्यर्पण होगा। बांग्लादेश में साल की शुरुआत में चुनाव और जनमत संग्रह दोनों होने वाले हैं। जुलाई चार्टर को लेकर भी देश में आतंरिक तौर पर खासी सुगबुगाहट भी है। ऐसे में सुरक्षा डायलॉग के साथ साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर हुई बातचीत आने वाले समय में भारत के लिहाज से भी बेहद अहम है।

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