
रुद्रपुर में किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सब्सिडी वाली यूरिया के दुरुपयोग और कालाबाजारी को रोकने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इसी क्रम में सिडकुल क्षेत्र स्थित प्लाईवुड फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण किया गया। यह कार्रवाई सिडकुल महाप्रबंधक एवं उपजिलाधिकारी रुद्रपुर मनीष सिंह विष्ट के नेतृत्व में की गई।
स्टॉक और खरीद रिकॉर्ड की गहन जांच
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्रियों में मौजूद यूरिया के भंडार का सत्यापन किया गया। साथ ही टेक्निकल ग्रेड यूरिया की खरीद, बिल और स्टॉक रजिस्टर का भी मिलान किया गया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि औद्योगिक इकाइयों में केवल निर्धारित टेक्निकल ग्रेड यूरिया का ही उपयोग हो रहा है।
प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली नीम कोटेड सब्सिडी यूरिया का उपयोग किसी भी औद्योगिक कार्य में पाया गया तो संबंधित इकाई के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाती है नीम कोटेड यूरिया
भारत सरकार किसानों की कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नीम कोटेड यूरिया अनुदान पर उपलब्ध कराती है। 45 किलोग्राम के एक बैग की निर्धारित कीमत मात्र 266.50 रुपये रखी गई है ताकि किसानों को कम लागत में उर्वरक मिल सके।
वहीं दूसरी ओर औद्योगिक उपयोग के लिए बाजार में गैर-अनुदानित टेक्निकल ग्रेड यूरिया उपलब्ध है, जिसकी 50 किलोग्राम की एक बोरी की कीमत लगभग 3500 रुपये है। कीमत में भारी अंतर होने के कारण सब्सिडी वाली यूरिया के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
किसानों से सतर्क रहने की अपील
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. विकेश कुमार सिंह यादव ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि यदि कहीं भी कृषि उपयोग के लिए मिलने वाली अनुदानित यूरिया का इस्तेमाल किसी फैक्ट्री या औद्योगिक इकाई में होता दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या स्थानीय पुलिस को दें।
उन्होंने कहा कि किसानों की हितकारी योजनाओं का गलत इस्तेमाल किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



