
देहरादून। देहरादून जनपद की विकासनगर तहसील में कश्मीरी उत्पाद बेचने वाले एक फेरीवाले परिवार के साथ हुई गंभीर मारपीट की घटना ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत कर गहरी नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।
पहचान पूछकर किया गया हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार डाकपत्थर क्षेत्र में बुधवार शाम कुछ हमलावरों ने फेरी लगाने वाले परिवार से उनकी पहचान पूछी। जैसे ही उन्हें पीड़ितों के कश्मीरी होने की जानकारी मिली, आरोप है कि हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। पीड़ित परिजनों का कहना है कि उन्हें घसीटा गया, थप्पड़ मारे गए और गाली-गलौज की गई।
युवक पर नुकीली रॉड से हमला, हालत गंभीर
घटना में 18 वर्षीय युवक पर लोहे की नुकीली रॉड से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसका इलाज जारी है। इस घटना के सामने आते ही जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन सहित कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
उमर अब्दुल्ला की मुख्यमंत्री धामी से बातचीत
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर इस घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरियों को डर के माहौल में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी नाराजगी जाहिर की और गृह मंत्रालय से अन्य राज्यों को इस विषय में अधिक संवेदनशील बनाने का आग्रह किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हाल में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
मुख्यमंत्री धामी का सख्त रुख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बताया कि घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच तेजी से जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन को निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड में रह रहे जम्मू-कश्मीर के सभी नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए।



