उत्तराखंडराज्य

रूद्रपुर में घुघुतिया त्योहार: पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति का अनूठा संगम

रूद्रपुर। उत्तराखण्ड का प्रसिद्ध घुघुतिया त्योहार (मकर संक्रांति का स्थानीय रूप) इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा रहा। सोमवार को संजय वन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में वेटलैंड्स और फिन्स बाया (बुनकर पक्षी) जैसी दुर्लभ प्रवासी चिड़ियों के संरक्षण पर जागरूकता फैलाई गई। कार्यक्रम में क्षेत्र के दर्जनों विद्यालयों के विद्यार्थी, वन विभाग के अधिकारी और स्थानीय समुदाय ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

जिलाधिकारी का संदेश: प्रकृति और पर्व का संतुलन

मुख्य अतिथि जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौदिया ने छात्रों द्वारा लगाए गए पर्यावरण आधारित स्टालों का निरीक्षण किया और कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी का सहयोग नहीं होगा तो इकोसिस्टम गड़बड़ा जाएगा, जिससे महामारी और अन्य गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि घुघुतिया त्योहार केवल लोकपर्व नहीं, बल्कि बच्चों, प्रकृति और परंपराओं से जुड़ा भावनात्मक उत्सव है। उन्होंने कहा कि हमें त्योहार मनाने के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी करनी चाहिए। वृक्षों से हमें शुद्ध वायु, पानी और स्वच्छ वातावरण मिलता है, इसलिए पौधारोपण और संरक्षण अनिवार्य है।

संजय वन का विकास और सुरक्षा

जिलाधिकारी ने बताया कि सांसद अजय भट्ट के निर्देशन में संजय वन को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। सुरक्षा हेतु वन क्षेत्र में फेंसिंग की गई है ताकि जानवरों और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने सभी से वन को सुंदर और स्वच्छ बनाने में सहयोग की अपील की।

नेचर साइंस इनिशिएटिव: वेटलैंड्स और इकोसिस्टम

डॉ. सौम्या प्रसाद ने बताया कि उधम सिंह नगर की वेटलैंड्स उत्तराखंड का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन अतिक्रमण, खेती और अन्य गतिविधियों से इकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे डॉक्टर हमारे स्वास्थ्य का पता बीपी और सांस से लगाते हैं, वैसे ही पक्षी हमें जमीन की सेहत बताते हैं। वन क्षेत्र में वृद्धि होने से भविष्य में पानी की समस्या बढ़ सकती है।

घुघुतिया: प्रकृति और संस्कृति का पर्व

घुघुतिया त्योहार पारंपरिक रूप से कुमाऊं में कौवों को घुघुते खिलाकर मनाया जाता है, जो प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। इसका उद्देश्य बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना जागृत करना है। इस वर्ष कार्यक्रम में बच्चों ने गीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से पर्यावरण संदेश भी साझा किए। साथ ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई।

वन विभाग की पहल और जल संरक्षण

वन विभाग ने बताया कि तराई क्षेत्र में गर्मी के मौसम में पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर रोक लगाई गई है, जिससे भविष्य में पानी की कमी की समस्या को रोका जा सके। वन विभाग ने कहा कि वे लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाते रहेंगे और इकोसिस्टम संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम का सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व

घुघुतिया त्योहार उत्तराखंड में संस्कृति और संरक्षण को जोड़ने का एक अनुपम उदाहरण बन गया है। इस अवसर पर तराई के पक्षी नामक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

उपस्थित प्रमुख व्यक्ति

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, डीएफओ यूसी तिवारी, सांसद प्रतिनिधि लक्ष्मण सिंह खाती, उप प्रभागीय वन अधिकारी शशि देव, मंडीप कौर, वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम, डॉ. रमन कुमार, मुकेश कांडपाल, अपूर्ण जोशी, पूजा बिष्ट, डीएस नेगी, दिग्विजय सिंह, डॉ. कमलेश अटवाल, ओम प्रकाश, शेर सिंह कोरंगा, वर्षा जोशी, जगदीश पांडे, युवराज सिंह खाती सहित छात्र-छात्राएं और पर्यटक उपस्थित थे।

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