
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। ED द्वारा जारी समन/नोटिस के तहत वे पूछे गए प्रश्नों का जवाब देने और मांगे गए आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हुए। रावत ने स्वयं सोशल मीडिया के जरिए ED कार्यालय पहुंचने की जानकारी साझा की।
फेसबुक पोस्ट के जरिए दी जानकारी, नोटिस की समय-सीमा पर उठाए सवाल
हरीश रावत ने अपनी फेसबुक पोस्ट में बताया कि उन्हें करीब दो दिन (36 घंटे) पहले ही ED की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था।
नोटिस के संदर्भ में उन्होंने निम्नलिखित बातें सामने रखीं:
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पुराने दस्तावेजों की मांग: नोटिस में वर्ष 2016 के प्रकरण से संबंधित आयकर रिटर्न (ITR) और चल-अचल संपत्तियों का ब्यौरा मांगा गया है।
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परिवार का दायरा स्पष्ट नहीं: उन्होंने सवाल उठाया कि नोटिस में ‘परिवार’ का दायरा क्या माना गया है, यह स्पष्ट नहीं है। उनका परिवार काफी बड़ा है और बेटियों की शादी भी हो चुकी है, ऐसे में इतने कम समय में सभी के दस्तावेज जुटाना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है।
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अकेले ही पहुंचे ED दफ्तर: कम समय मिलने के कारण उन्होंने किसी अन्य नेता या कार्यकर्ता को इसकी जानकारी नहीं दी और न ही किसी को साथ बुलाया। उन्होंने लिखा कि वे केवल अपनी ‘माँ का आशीर्वाद’ लेकर अकेले ही ED कार्यालय पहुंचे हैं।
क्या है पूरा मामला? (VPDO भर्ती अनियमितता एवं मनी लॉन्ड्रिंग)
यह पूरा मामला वर्ष 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित है।
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ED की छापेमारी और जब्ती: 10 सितंबर को ED ने देहरादून में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान लगभग 1.28 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी, लग्जरी घड़ियां और अन्य परिसंपत्तियां जब्त/फ्रीज की गईं।
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पूर्व OSD चंदन सिंह जीना का जुड़ाव: यह जब्ती हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) और वर्तमान निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों से हुई है। जीना वर्ष 2014 से 2017 के बीच हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके OSD पद पर कार्यरत थे।
कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से दिया था त्यागपत्र
ED द्वारा अपने पूर्व सहयोगी के ठिकानों पर की गई कार्रवाई के बाद, हरीश रावत ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस संगठन में अपने दो प्रमुख पदों से हटने की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह उनका कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं है।



