
हरिद्वार। कांवड़ मेला-2026 को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नगर निगम हरिद्वार ने कांवड़ मार्ग पर चार ‘ग्रीन चौकियां’ स्थापित की हैं। इन चौकियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
नगर निगम द्वारा स्थापित ये ग्रीन चौकियां पुल जटवाड़ा, कांवड़ पटरी प्रेमनगर, ऋषिकुल और सीसीआर चौक पर संचालित की जा रही हैं।
प्लास्टिक के बदले दिए जा रहे कम्पोस्टेबल बैग
ग्रीन चौकियों पर तैनात स्वयंसेवक श्रद्धालुओं से प्लास्टिक पॉलीथिन और अन्य सिंगल यूज़ प्लास्टिक सामग्री एकत्र कर रहे हैं। इसके बदले उन्हें निःशुल्क कम्पोस्टेबल ग्रीन बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके साथ ही श्रद्धालुओं को गंगा, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्लास्टिक के नकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी जा रही है। लोगों को प्लास्टिक का उपयोग छोड़कर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता के केंद्र बन रहीं ग्रीन चौकियां
नगर निगम का कहना है कि यह अभियान केवल प्लास्टिक के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है। ग्रीन चौकियों को पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रा को अधिक स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना है, ताकि श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ सके।
जनप्रतिनिधियों ने भी की पहल की सराहना
अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को भी इससे जोड़ा गया है। कृष्णा नगर वार्ड के पार्षद परमिंदर सिंह गिल ने ग्रीन चौकी का निरीक्षण किया और नगर निगम की इस पहल की सराहना की।
उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि ऐसे अभियान लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने में मदद करते हैं।
नगर निगम की टीम कर रही अभियान का संचालन
नगर आयुक्त नंदन कुमार के निर्देशन में चल रहे इस अभियान में उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, मुख्य सफाई निरीक्षक संजय शर्मा, सफाई निरीक्षक अनिल कुमार सहित नगर निगम की टीम सक्रिय रूप से जुटी हुई है।
नगर निगम को उम्मीद है कि कांवड़ मेला-2026 के दौरान यह पहल सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के साथ-साथ लाखों श्रद्धालुओं तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



