
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संचालित मदरसों के सभी गतिविधियों की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है। शासन की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी भी मदरसे में अनियमितता पाई गई तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मदरसों की गतिविधियों की होगी गहन पड़ताल
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जांच में मदरसों के दैनिक संचालन, छात्रों की वास्तविक उपस्थिति, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ, वित्तीय स्रोत और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।
विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि मदरसों में शिक्षा व्यवस्था सही तरीके से संचालित हो रही है या नहीं और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र छात्रों तक पहुंच रहा है या नहीं।
बाहरी राज्यों से बच्चों को लाने की शिकायतों से सरकार सतर्क
राज्य के मैदानी जिलों में संचालित कुछ मदरसों को लेकर शिकायतें मिली थीं कि पढ़ाई के नाम पर अन्य राज्यों से बच्चों को लाया जा रहा है। इन शिकायतों के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया।
करीब एक माह पहले शासन ने ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल और देहरादून के जिलाधिकारियों को विशेष जांच के निर्देश दिए थे। अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा गया था कि बाहरी राज्यों से आने वाले बच्चे अपनी इच्छा से आ रहे हैं या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।
कल्याणकारी योजनाओं में अनियमितता की भी जांच
सरकार के संज्ञान में यह मामला भी आया कि कुछ मदरसों में पीएम पोषण योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में अनियमितताओं की आशंका है। अब जांच टीम इन योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की भी जांच करेगी।
विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि संबंधित जिलों को जल्द रिपोर्ट भेजने के लिए रिमाइंडर भी जारी किया जा रहा है।
राज्य में संचालित हैं 452 मदरसे
उत्तराखंड में वर्तमान समय में कुल 452 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें पहली से आठवीं कक्षा तक के 400 मदरसे और नौवीं से 12वीं तक के 52 मदरसे शामिल हैं।
सरकार अब इन सभी संस्थानों की कार्यप्रणाली की निगरानी को और अधिक सख्त बनाने की तैयारी कर रही है।
1 जुलाई 2026 से खत्म हो जाएगा मदरसा बोर्ड
उत्तराखंड सरकार ने पिछले वर्ष अक्टूबर में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू किया था। इस अधिनियम का उद्देश्य मुस्लिम समेत सभी अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों को एक ही व्यवस्था के तहत लाना है।
नए नियमों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे। इसके साथ ही उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।
शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेना अनिवार्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आठवीं तक संचालित मदरसों को जिला स्तर पर और नौवीं से 12वीं तक के मदरसों को 30 जून 2026 तक उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अधिनियम में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन भी किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कोशिश
सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करना है। साथ ही छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और योजनाओं का सही तरीके से लाभ पहुंचाना भी प्राथमिकता में शामिल है।



