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‘वैश्विक तनाव के बीच भारत शांति का संदेश दे रहा’, मिडिल ईस्ट में जंग के बीच पीएम मोदी का बड़ा बयान

राजधानी नई दिल्ली में कूटनीतिक हलचल के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। दोनों नेताओं के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक के उपरांत प्रधानमंत्री मोदी ने ‘भारत-दक्षिण कोरिया रणनीतिक साझेदारी’ को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्षों और वैश्विक अस्थिरता के बीच, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और कोरिया की मैत्री दुनिया के लिए शांति एवं स्थिरता का एक सशक्त संदेश है।

इंडो-पैसिफिक विजन: विकास और समावेशिता की ओर कदम

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दक्षिण कोरिया की बढ़ती भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने खुशी जाहिर की कि दक्षिण कोरिया अब ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ और ‘इंडो पैसिफिक ओसन इनिशिएटिव’ का हिस्सा बन रहा है। पीएम मोदी के अनुसार, दोनों राष्ट्र एक ऐसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के प्रति समर्पित हैं जो शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी हो। इसके साथ ही, उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में समयबद्ध सुधारों को अपरिहार्य बताया।

पूर्व की ज्योति: विकसित भारत 2047 का संकल्प

महान कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की पंक्तियों का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने दक्षिण कोरिया को “Lamp of the East” (पूर्व की ज्योति) कहकर संबोधित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि दक्षिण कोरिया, भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के महान संकल्प को सिद्ध करने में एक अपरिहार्य और भरोसेमंद साझेदार की भूमिका निभाएगा।

डिजिटल सेतु और तकनीकी क्रांति: भविष्य की नींव

आगामी दशक की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने “इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज” की महत्वपूर्ण घोषणा की। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार खोलेगी। आर्थिक संबंधों को विस्तार देते हुए दोनों देशों ने जहाज निर्माण, सस्टेनेबिलिटी, स्टील और पोर्ट्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर मुहर लगाई है।

रचनात्मक उद्योग और आर्थिक विकास का नया संगम

प्रौद्योगिकी के साथ-साथ सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षेत्रों में भी सहयोग की नई रूपरेखा तैयार की गई है। फिल्म निर्माण, एनीमेशन और गेमिंग उद्योग में दोनों देश अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे। प्रधानमंत्री ने बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि 2010 में ‘सीईपीए’ (CEPA) लागू होने के बाद व्यापारिक रिश्तों में जो गति आई थी, वह अब और तेज होगी। चिप से लेकर जहाज तक और प्रतिभा से लेकर प्रौद्योगिकी तक, भारत और कोरिया अब हर उस क्षेत्र में साथ काम करेंगे जो आधुनिक युग की मांग है।

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