
आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (आईआईएसडब्ल्यूसी), देहरादून ने मंगलवार को अपने मुख्यालय में 73वां स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, किसानों और विभिन्न हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी की।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि की उपस्थिति
मुख्य अतिथि के रूप में सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) देहरादून के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में स्प्रिंगशेड एवं नदी पुनर्जीवन एजेंसी (सारा) उत्तराखंड की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी कहकशां नसीम ने भाग लिया।
डॉ. बिष्ट ने संस्थान द्वारा मृदा एवं जल संरक्षण, भूमि क्षरण में कमी, वर्षा जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने सतत विकास के लिए संरक्षण तकनीकों को ऊर्जा दक्षता के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कहकशां नसीम ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और नदी पुनर्जीवन के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए आईआईएसडब्ल्यूसी और राज्य एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संस्थान की उपलब्धियां और योगदान
संस्थान के निदेशक डॉ. एम. मदहु ने अपने संबोधन में भूमि क्षरण नियंत्रण, जल संरक्षण और वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में उत्पादकता वृद्धि के लिए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों को साझा किया।
संस्थान की स्थापना 1953-54 में हुई थी और यह आईसीएआर के प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रभाग के अंतर्गत कार्य करता है। देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में इसके क्षेत्रीय केंद्र स्थान-विशिष्ट तकनीकों का विकास और प्रसार कर रहे हैं।
वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, जल अपरदन के कारण भूमि क्षरण में उल्लेखनीय कमी आई है, जो 39.87 प्रतिशत (125.99 मिलियन हेक्टेयर) से घटकर 26.31 प्रतिशत (86.04 मिलियन हेक्टेयर) हो गई है। संस्थान ने जलग्रहण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से 100 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उपचार कार्य किया है।
संस्थान की तकनीकों से फसल उत्पादकता में 40 से 412 प्रतिशत तक वृद्धि, जल उपयोग दक्षता में 30 से 84 प्रतिशत सुधार, और उर्वरकों में लगभग 10 से 15 हजार करोड़ रुपये की वार्षिक बचत संभव हुई है। इसका लाभ किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु सहनशीलता मजबूत करने में हुआ है।
कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियां
- प्रगतिशील किसानों का सम्मान
- तकनीकी पुस्तिकाओं और हिंदी पत्रिका ‘बुरांश’ का विमोचन
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद गतिविधियाँ, जिसमें लगभग 160 प्रतिभागियों ने भाग लिया
निष्कर्ष
आईआईएसडब्ल्यूसी का स्थापना दिवस न केवल संस्थान की उपलब्धियों का जश्न है, बल्कि मृदा और जल संरक्षण के क्षेत्र में सतत प्रगति और किसानों के लिए तकनीकी समाधान प्रदान करने की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करता है।



