उत्तर प्रदेशराज्य

CM योगी आज करेंगे मानव-वन्यजीव संघर्ष व वानिकी के नायकों को सम्मानित, जुटेंगे देश भर के विशेषज्ञ

लखनऊ | :​आज विश्व वानिकी दिवस (World Forestry Day) के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बन रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ‘अरण्य समागम: राष्ट्रीय वानिकी संवाद’ कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इस भव्य समारोह में न केवल पर्यावरण संरक्षण पर मंथन होगा, बल्कि उन जांबाजों को भी सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया है।

​अरण्य समागम: 17 राज्यों के विशेषज्ञों का महाकुंभ

​उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा आयोजित इस ‘अरण्य समागम’ में देश के 17 राज्यों के वन विशेषज्ञ, पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक शिरकत कर रहे हैं। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद का मुख्य उद्देश्य वनीकरण की नई तकनीकों, वन प्रबंधन और सबसे महत्वपूर्ण—मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा करना है।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण:

  • वनीकरण की नई रणनीति: जलवायु परिवर्तन के दौर में वनों के घनत्व को बढ़ाने पर चर्चा।
  • तकनीकी समाधान: ड्रोन और AI के जरिए जंगलों की निगरानी।
  • संघर्ष निवारण: रिहायशी इलाकों में घुसने वाले वन्यजीवों को सुरक्षित वापस भेजने की आधुनिक तकनीकें।

​साहस को सलाम: सम्मानित होंगे ये ‘रियल हीरोज’

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंच से उन बच्चों और अधिकारियों को सम्मानित करेंगे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में साहस की मिसाल पेश की है।

​1. बहराइच के नन्हे रक्षक: अच्छे लाल

​बहराइच का तराई क्षेत्र अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष का केंद्र रहता है। यहाँ के बालक अच्छे लाल ने अदम्य साहस दिखाते हुए न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं में प्रशासन की मदद की। उनकी वीरता आज प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

​2. प्रयागराज की जांबाज: तनु सिंह

​प्रयागराज की तनु सिंह को उनकी त्वरित सूझबूझ और बहादुरी के लिए सम्मानित किया जा रहा है। वन्यजीव हमले के दौरान उन्होंने जिस तरह से धैर्य का परिचय दिया, वह नारी शक्ति और साहस का अद्भुत उदाहरण है।

​3. कर्तव्यपरायण अधिकारी: मुरादाबाद के पुष्पेन्द्र सिंह

​वन विभाग के अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह (मुरादाबाद) ने वानिकी और वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। विशेष रूप से मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए उनके द्वारा लागू किए गए ‘मुरादाबाद मॉडल’ की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। उनके प्रयासों से न केवल वन्यजीवों की रक्षा हुई है, बल्कि स्थानीय निवासियों में सुरक्षा का भाव भी जागा है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक बड़ी चुनौती

​उत्तर प्रदेश में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बहराइच जैसे जिले बाघों और तेंदुओं की मौजूदगी के कारण संवेदनशील माने जाते हैं। सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी सरकार ने ‘वन्यजीवों से जनहानि’ को आपदा की श्रेणी में शामिल किया है, जिससे पीड़ितों को तत्काल सहायता मिलती है। आज के संवाद में विशेषज्ञों द्वारा इस बात पर जोर दिया जाएगा कि कैसे ‘इको-बैरियर्स’ और सामुदायिक भागीदारी के जरिए इस संघर्ष को खत्म किया जा सकता है।

हरा-भरा उत्तर प्रदेश, सुरक्षित उत्तर प्रदेश

​मुख्यमंत्री का यह कदम संदेश देता है कि उत्तर प्रदेश न केवल औद्योगिक विकास की ओर अग्रसर है, बल्कि अपनी प्राकृतिक विरासत को सहेजने के लिए भी पूरी तरह संकल्पित है। ‘अरण्य समागम’ से निकले निष्कर्ष आगामी वर्षों में भारत की वानिकी नीतियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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