उत्तराखंडराज्य

डिजिटल क्रांति से सशक्त उत्तराखंड: मुख्यमंत्री ने एक क्लिक पर ट्रांसफर किए ₹176 करोड़ से अधिक, 9.7 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी हुए लाभान्वित

उत्तराखंड में सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने गुरुवार को देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक जागरूकता एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में शिरकत की। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक ‘वन क्लिक’ (डीबीटी) के माध्यम से राज्य की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मई 2026 माह की पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की। सरकार के इस कदम से पारदर्शी तरीके से प्रदेश के 9 लाख 74 हजार 338 लाभार्थियों के खातों में कुल 176 करोड़ 59 लाख 24 हजार रुपये की विशाल धनराशि सीधे पहुँची है।

सामाजिक सुरक्षा और नशा मुक्ति का संकल्प

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल वित्तीय सहायता ही नहीं दी, बल्कि समाज को एक स्वस्थ दिशा देने के लिए कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को नशा मुक्ति अभियान तथा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और देखभाल के प्रति पूरी निष्ठा से काम करने की शपथ भी दिलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की राज्य स्तरीय जागरूकता कार्यशालाएं सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में सेतु का काम करेंगी। सरकार का मुख्य संकल्प यही है कि हर जरूरतमंद को बिना किसी भेदभाव, प्रशासनिक देरी या बाधा के योजनाओं का सीधा लाभ मिले।

केंद्र और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं का संगम

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश में जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों का जीवन बदला है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित की जा रही सामाजिक न्याय की कई बड़ी उपलब्धियों को सामने रखा:

  • निःशुल्क गैस सिलेंडर: अंत्योदय परिवारों को प्रतिवर्ष तीन गैस सिलेंडर पूरी तरह मुफ्त दिए जा रहे हैं।

  • दिव्यांगों को संबल: दिव्यांग कर्मचारियों के वाहन भत्ते में सम्मानजनक वृद्धि की गई है।

  • महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों को ‘लखपति दीदी योजना’ और आधुनिक कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

आर्थिक तरक्की और बुनियादी ढांचे का विकास

उत्तराखंड की आर्थिक प्रगति और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर हो रहे अभूतपूर्व कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के कुछ बेहद शानदार आंकड़े साझा किए:

  • अर्थव्यवस्था में उछाल: पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना तक बढ़ चुकी है।

  • जीएसडीपी और आय: बीते एक वर्ष में राज्य के जीएसडीपी (GSDP) में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है।

  • रोजगार की बहार: बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है और राज्य का कुल बजट अब एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।

  • वैश्विक पहचान: राष्ट्रीय खेलों और जी-20 की बैठकों के सफल आयोजन से उत्तराखंड का नाम दुनिया भर में चमका है। साथ ही केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन सहित विभिन्न पर्यटन कॉरिडोर पर काम तेजी से चल रहा है।

कड़े फैसलों से सुरक्षित और पारदर्शी हुआ राज्य

प्रशासनिक सुधारों और कानून व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। इसी का नतीजा है कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून और नया भू-कानून पूरी मजबूती से लागू किया गया है। सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करने के अभियान के तहत अब तक 11 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, ऐतिहासिक नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद पिछले साढ़े चार वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं।

सरलीकरण और जवाबदेही पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें, प्रक्रियाओं का सरलीकरण करें और तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने विभिन्न आयोगों, परिषदों और समितियों के पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की स्वयं निगरानी करें और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही तय करें।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्रियों, विधायक सविता कपूर, पार्वती दास, भूपाल राम टम्टा सहित विभिन्न आयोगों, परिषदों और समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं शासन-प्रशासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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