उत्तराखंडराज्य

फर्जी दस्तावेजों से यूपी निवासी बना उत्तराखंड का स्थायी नागरिक, सितारगंज में दर्ज हुआ मुकदमा

सितारगंज में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां उत्तर प्रदेश के एक निवासी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड का स्थायी निवासी बनने का आरोप लगा है। आरोप है कि व्यक्ति ने कूटरचित प्रमाण पत्रों का उपयोग कर न केवल स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाया, बल्कि राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज भी हासिल कर लिए।

भूमिहीन प्रमाण पत्र के सहारे कृषि भूमि खरीद का आरोप
शिकायत में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी भूमिहीन प्रमाण पत्र बनवाकर उत्तराखंड में कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त की। यह कार्य उत्तराखंड भू-अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मियों से मिलीभगत कर यह पूरा खेल रचा गया।

शिकायतकर्ता ने शासन को भेजा पत्र
ग्राम लौका निवासी पुष्पेन्द्र सिंह कम्बोज ने शासन को पत्र भेजकर ग्राम दड़हा में रह रहे सुनील यादव पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत में कहा गया कि सुनील यादव ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राज्य का स्थायी निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज, राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवाया।

एसआईटी जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान तहसील से प्राप्त दस्तावेजों की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ। स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट का जो दस्तावेज लगाया गया था, वह कूटरचित पाया गया। वास्तविक मतदाता सूची में उस क्रमांक पर एक महिला का नाम दर्ज था।

फर्जी वोटर लिस्ट से बने अन्य पहचान पत्र
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि फर्जी वोटर लिस्ट के आधार पर आरोपी ने राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बनवा लिए। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने शिकायतकर्ता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।

शस्त्र लाइसेंस और गनर लेने का भी आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे शस्त्र लाइसेंस भी प्राप्त किया और सरकारी गनर की सुविधा ली। आरोप है कि गनर की मौजूदगी का भय दिखाकर वह भू-माफिया की तरह कार्य कर रहा था।

भूमिहीन प्रमाण पत्र पर उठे सवाल
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में उप तहसील नानकमत्ता ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 के बाद कोई भी भूमिहीन प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। न तो इसकी कोई पंजिका उपलब्ध है और न ही तहसील कार्यालय में इसकी प्रति मौजूद है। इसके बावजूद भूमि खरीद-फरोख्त किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस ने शुरू की विवेचना
पुलिस क्षेत्राधिकारी बीएस धौनी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहन विवेचना की जा रही है। लंबे समय से आरोपी पर राज्य के भूमि कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप लगते रहे हैं।

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